कैथल। पथरी के ऑपरेशन के लिए लिथोट्रिप्सी मशीन के ठीक होने की अब आस जगी है। इस मशीन की जांच को लेकर जिला नागरिक अस्पताल में बुधवार को फ्रांस से इंजीनियर पहुंचे थे। उन्होंने मशीन के खराब हुए पार्ट की जानकारी ली है। इंजीनियर पार्ट की जानकारी लेने के बाद रिपोर्ट बनाकर मशीन बनाने वाली कंपनी को भेजेंगे। यदि यह रिपोर्ट सही मिली तो इस मशीन का पूरा पार्ट बदल दिया जाएगा।
सामान्य अस्पताल में चूहों के कुतरने के कारण लिथोट्रिप्सी मशीन खराब हो गई थी। इसे चलाने वाला एक पार्ट बिल्कुल खराब हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग की निदेशालय की टीम ने भी दौरा किया था।
जिला नागरिक अस्पताल में पिछले करीब दो साल से पथरी के ऑपरेशन वाली लिथोट्रिप्सी मशीन खराब है। इसकी कीमत करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की है और यह फ्रांस से करीब चार साल पहले ही लाई गई थी। कुछ महीने पहले ही इसे ठीक करवाने के लिए विभाग ने 10 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी परंतु यहां के इंजीनियरों से यह मशीन ठीक नहीं हो पाई है। अमर उजाला मशीन खराब होने का मुद्दा प्रमुखता से उठा चुका है।
गौरतलब है कि मरीजों को पथरी निकलवाने के लिए निजी अस्पतालों में 20 से 25 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं जबकि सरकारी अस्पताल में उन्हें यह सुविधा मुफ्त मिल रही थी।
इस मशीन की सबसे खास बात यह है कि इसके माध्यम से पथरी के मरीज को ऑपरेशन करवाने की जरूरत नहीं पड़ती।
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि खराब लिथोट्रिप्सी मशीन की जांच करने के लिए वीरवार को फ्रांस से दो इंजीनियर पहुंचे थे। इनको कंपनी ने ही भेजा था। इंजीनियरों ने मशीन के खराब हुए पार्ट की जानकारी ली है।
लेजर तकनीक का प्रयोग
लिथोट्रिप्सी में किडनी की पथरी को तोड़ने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पथरी को निकाला जा सकता है।