संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बालू गांव की बिढाण पट्टी के तालाबोंं व गलियों पर अवैध कब्जे के मामले मेंं एसडीएम और बीडीपीओ को तीन मई 2024 को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता गुरदेव सिंह बालू की ओर से दाखिल याचिका पर जवाब देना है। इसके मद्देनजर मंगलवार को प्रशासन ने कब्जों को हटाने की कार्रवाई शुरू की।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट दिनेश ढिल्लो और बीडीपीओ कंचनलता विभागीय कर्मियों की टीम के साथ मंगलवार को गांव पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी मेंं कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। अधिकारियों का कहना है कि कार्यवाही के तहत जहां कब्जों को हटाया, वहीं, अंडर टेकिंग कार्यवाही हुई है। कुछ मामले ऐसे हैं, जो विचाराधीन हैं। पूरी स्थिति की रिपोर्ट तैयार करते हुए शीर्ष अधिकारियों को भेजी जाएगी।
उधर, मौके पर मौजूद याचिकाकर्ता गुरदेव सिंह बालू ने प्रशासन की कार्रवाई पर अंसतोष जताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर मेंं भी अधिकारी फीते और कदमोंं से जमीन की नापजोख कर रहे हैं। इससे उनकी कब्जाधारियोंं से सांठगांठ जाहिर होती है। वे फिर हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे। याचिकाकर्ता गुरदेव सिंह बालू ने करीब नौ वर्ष पहले बिढाण पट्टी में तालाबों व गलियों की जमीन पर अवैध कब्जों का मामला उजागर किया था। इसमेंं कार्रवाई के लिए उन्होंने सीएम पटल पर शिकायत दी थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर निशानदेही मेंं कब्जोंं की पुष्टि हुई। इस पर उन्होंने कब्जों को हटाने के लिए एसडीएम कोर्ट में केस दाखिल किया। वर्ष 2021 मेंं एसडीएम कोर्ट ने तालाबों से कब्जे हटाने के आदेश दिए। दो वर्ष बीत जाने के बाद भी पंचायत व राजस्व विभाग कब्जों को हटाने में नाकाम रहा। एसडीएम कोर्ट के आदेशों के बाद भी तालाबों की जमीन से कब्जे नहीं हटाए गए तो उन्हें मजबूरन हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
जनवरी 2024 में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कलायत एसडीएम और बीडीपीओ को तीन मई 2024 को आदेशों का पालन करने के संबंध में न्यायालय मेंं हाजिर होने के लिए नोटिस जारी किया है। गुरदेव सिंह का यह भी आरोप है कि प्रशासन की ओर से इस संबंध में जब भी कार्रवाई की जाती है, तब महिला सरपंच की बजाए उनके प्रतिनिधि को प्रशासनिक अधिकारी अपने साथ रखते हैं। यह पंचायतों में महिलाओंं की सहभागिता के लिए बनाए गए नियम की सरासर अवहेलना है।