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Kaithal News: इलेक्ट्रीशियन को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 55.30 लाख

Sun, 08 Jun 2025 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। शहर के चौधरिया मोहल्ला निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग इलेक्ट्रीशियन रमेश कुमार साइबर ठगी का शिकार हो गए। एक व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर उनसे 55 लाख 30 हजार रुपये की कर ली।

आरोपी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी, फर्जी एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेजों का हवाला देकर डराया। मामले में साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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ऐसे फंसा जाल में ः 29 मई को दोपहर करीब 12:45 बजे रमेश कुमार के मोबाइल पर व्हाट्सएप मैसेज आया, जिसमें “क्राइम ब्रांच मुंबई” लिखा था। इसके तुरंत बाद उसी नंबर से वीडियो कॉल आई।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि रमेश कुमार के नाम पर जारी एक मोबाइल नंबर का धोखाधड़ी में इस्तेमाल हुआ है।

जब रमेश कुमार ने इससे इनकार किया, तो आरोपी ने आधार कार्ड मांगा। खुद को सही साबित करने के लिए उन्होंने अपने आधार कार्ड की फोटो भेज दी। इसके बाद आरोपी ने कहा कि उनके बैंक खातों का प्रयोग मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है और इस पर उन्हें 20 लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप है।

जब होश आया तो बहुत देर हो चुकी थी ः 3 जून को आरोपी ने दावा किया कि रमेश का मनी लॉन्ड्रिंग से कोई संबंध नहीं निकला और 72 घंटे में रुपये लौटाए जाएंगे। लेकिन 4 जून को जब रमेश ने कॉल किया, तो आरोपी ने फोन नहीं उठाया और न ही कोई पैसा वापस आया। तब जाकर रमेश को ठगी का अहसास हुआ।

साइबर थाना प्रभारी सुभ्रांशु ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर अपराध की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

झूठी एफआईआर और दस्तावेजों का हवाला

आरोपी ने रमेश को एक फर्जी एफआईआर की कॉपी और कुछ सुप्रीम कोर्ट से संबंधित दस्तावेज भेजे और कहा कि कोर्ट ने उन्हें तीन दिन का समय दिया है, जिसमें उनके खातों की जांच की जाएगी।
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किसी मामले में फंसने के डर के कारण रमेश कुमार ने 31 मई को 23 लाख रुपये, फिर 1 जून को 21 लाख रुपये, और 2 जून को 8.5 लाख रुपये विभिन्न खातों में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए।
डिजिटल अरेस्ट से कभी भी डरें नहीं
डिजिटल अरेस्ट एक नई किस्म की ऑनलाइन ठगी है, जिसमें साइबर अपराधी खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच या कोई सरकारी अधिकारी बताकर डर पैदा करते हैं।

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पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का कोई अधिकारी वीडियो कॉल पर न तो अरेस्ट करता है और न ही पैसों की मांग करता है।

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किसी अनजान कॉल पर आधार, ओटीपी, बैंक डिटेल या पासवर्ड कभी न दें।

n वाट्सएप पर भेजे गए कागजों की प्रामाणिकता जांचे बिना कतई भरोसा न करें।

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कॉल रिकॉर्ड करें और स्क्रीनशॉट लें। यह पुलिस जांच में मदद करेगा।

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नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल: www.cybercrime.gov.in
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