कलायत। इससे बड़ी शायद ही कोई विडंबना हो सकती है कि एक ओर जहां दुर्गाष्टमी पर्व मनाने के लिए कंजक पूजन की तैयारियां चल रही थीं, वहीं दूसरी और गांव बड़सीकरी में रविवार की रात को किसी ने करीब आठ माह की मासूम बच्ची को लावारिस हालत में छोड़ दिया।
रात करीब बारह बजे मासूम बच्ची हाथ में बिस्किट लिए सुनसान गली में सहमी खड़ी थी। गांव के धूप सिंह ने बच्ची की रोने की आवाज सुनी और वह उसे अपने घर ले गए। धूप सिंह ने बताया कि रात को उसने बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो वह घर से बाहर आया तथा हैरान रह गया कि बच्ची बुग्गी के नीचे बैठी रो रही है। धूप सिंह ने सरपंच के माध्यम से मामले की सूचना कलायत पुलिस स्टेशन में दी।
थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने धूप सिंह को कहा कि सुबह तक वह बच्ची अपने पास रखे। इसके बाद सोमवार सुबह थाना प्रभारी ओमप्रकाश पुलिस टीम के साथ गांव बड़सीकरी पहुंच गए तथा बच्ची के बारे में जानकारी हासिल कर कब्जे में ले लिया।
कुत्तों के भौंकने पर खुली नींद
धूप सिंह ने बताया कि कुत्तों के भौंकने और बच्चे की रोने की आवाज सुन कर उसकी आंख खुल गई। उसने बाहर जाकर देखा कि गली में खड़ी एक झोटा बुग्गी के नीचे एक मासूम बच्ची खड़ी थी। उसके हाथ में बिस्कुट था तथा उसके सिर के पास एक तौलिया रखा हुआ था।
बच्ची से संबंधित सारी जानकारी लेकर पुलिस पार्टी बच्ची को अपने साथ लेकर पुलिस स्टेशन आ गई। गांव के लोगों का एक प्रतिनिधि मंडल सुबह थाना में भी आया तथा उन्होंने बच्ची का पालन पोषण करने के लिए ग्रामीणों को सौंपने का आग्रह किया, मगर थाना प्रभारी ने सारी कानूनी कार्रवाई अमल में लाने की बात कही, जिसके चलते ग्रामीण वहां से जिला मुख्यालय जाने की बात कहकर वहां से चले गए। बाद में बच्ची को बाल संरक्षण समिति को सौंप दिया गया।
बाल कल्याण समिति को सौंपा : एसएचओ
कलायत थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने बताया कि बडसीकरी कलां व खुर्द में बच्ची के पहचान करने बारे में कहा गया है, मगर अभी तक बच्ची की पहचान नहीं हो पाई है। यह भी नहीं पता चल पाया है कि आखिरकार नवजात यहां इस अवस्था में छोड़कर गया है। बच्ची को जिला बाल संरक्षण समिति को सौंप दिया गया है।
पूरी तरह स्वस्थ है मासूम
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सैनी ने कहा कि कलायत खंड के गांव बडसीकरी में मिली मासूम बच्ची के जिला मुख्यालय पहुंचते ही सबसे पहले इसका मेडिकल करवाया गया, जिसमें वह पूरी तरह तंदरुस्त पाई गई। स्वास्थ्य जांच के पश्चात बच्ची को अस्थायी तौर पर जहां बाल सेवा आश्रम कैथल में रखा जाएगा, वहीं बच्ची के अभिभावकों को ढूंढने का प्रयास भी किया जाएगा। यदि सप्ताह भर तक बच्ची के अभिभावकों का कहीं कोई पता वहीं चलता तो इसे शिशु बाल गृह पंचकूला भेज दिया जाएगा।