कैथल। सावन सिर्फ एक मौसम या महीना नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में यह श्रद्धा, प्रेम, प्रकृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इसे जीवंत बनाए रखने के लिए कुछ ठोस प्रयास करना बेहद ज़रूरी है। ˘
विशेष रूप से आज के डिजिटल युग में जहां परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं। हमें सावन की परंपराओं को जीवंत रखने के लिए प्रयास करने होंगे। यहां कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनसे सावन की परंपराओं को फिर से जीवंत किया जा सकता है।
सावन झूला, मेहंदी प्रतियोगिता, लोकगीत गायन, रक्षा बंधन उत्सव जैसे पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। स्कूलों में सावन पर आधारित ड्राइंग, निबंध लेखन, लोकगीत प्रतियोगिताएं करवाई जाएं। बच्चों को सावन से जुड़े धार्मिक और प्राकृतिक पक्ष के बारे में बताया जाए। लोगों को तुलसी, बेल, पीपल जैसे पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
प्रस्तुति: प्रीति मुटरेजा, सीवन।