सरकार द्वारा गरीब एवं जरूरमंद बच्चों को 134 ए के तहत मनचाहे स्कूल में निशुल्क दाखिले के लिए रामदिया चावरिया पिछले कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं। कैथल में दस जमा दो मुद्दे के प्रभावी चावरिया हर साल इन बच्चों को इस नियम के तहत निशुल्क दाखिले के लिए ना केवल अधिकारियों तक लड़ाई लड़ते हैं, बल्कि निजी स्कूल संचालकों से भी उन्हें दो चार होना पड़ता है।
गरीब बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए अपनाया संघर्ष का रास्ता
रामदिया चावरिया ने कहा कि जब कुछ अपरिहार्य कारणों के कारण वह उच्च शिक्षा से वंचित रहे तो उन्हें इसका काफी झटका लगा, लेकिन उसी समय से उन्होंने गरीबों को शिक्षा दिलवाने के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाने का फैसला लिया। जिसके तहत वह पिछले छह सालों से गरीबों को बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए प्रयासरत हैं।
घर-घर जाकर करते हैं प्रचार, करवाया हजारों बच्चों का दाखिला
134 ए के तहत अधिक से अधिक गरीब लोगों के बच्चों को शिक्षा दिलवाने के उद्देश्य से वह घर-घर जाकर प्रचार प्रसार करते हैं। जिसके लिए वे दिन हो या रात 134 ए के फार्म भरवाने के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। इसी कारण से वे पिछले छह सालों में हजारों बच्चों का 134 ए के तहत दाखिला करवा चुके हैं।
हर गरीब को मिले शिक्षा यही उद्देश्य
रामदिया ने कहा कि प्रदेश में हर गरीब के बच्चे को शिक्षा मिले यही उनका उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि गरीबों के बच्चे उच्च परिवारों का केवल अपनी शिक्षा के माध्यम से मुकाबला कर सकता हैं। यदि गरीबों को शिक्षा मिलेगी तो वह अपने आप ही उच्च परिवारों का मुकाबला कर सकेंगे।
प्रशासन मांगे स्कूलों से ब्योरा
चावरिया ने बताया कि 134 ए के तहत नियमानुसार 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं लेकिन अधिकतर प्राइवेट स्कूल 134 ए के तहत 10 प्रतिशत दाखिले ही करते हैं। इसलिए वे प्रशासन से अपील करते हैं कि वह सभी प्राइवेट स्कूलों से इसका ब्योरा मांगे।