अमेरिका से आए बीस विद्यार्थियों के दल ने वीरवार को चार टीमें बनाकर जिले में अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों से बातचीत की और अपने विषय से संबंधित तथ्य जुटाए। विद्यार्थी गांव गोहरा खेड़ी में शहद उत्पादक किसानों, कलायत में लाइब्रेरी, तितरम में आशा वर्करों के कार्य, खेड़ी गुलाम अली में सेनिटरी पैड बनाने वाली महिलाओं से मुलाकात की।
संभव संस्था के निदेशक कुमार मुकेश ने बताया कि विद्यार्थियों के दल को अलग-अलग टीमों में बांटा गया है। प्रो. स्कॉट की अगुवाई में आए विद्यार्थियों ने वीरवार को गांव गोहरा खेड़ी में शहद उत्पादक किसानों से बातचीत की। उन्होंने पता लगाया कि किस तरह से आज पूरा गांव शहद उत्पादन के काम में लगा हुआ है। जिससे उनकी आजीविका चलती है। यहां किसान परिवार के सदस्यों से मिले।
इसी प्रकार से कलायत में चल रही लाइब्रेरी का अध्ययन किया। साथ ही खेड़ी गुलाम अली में सेनेटरी पैड निर्माता महिलाओं व स्वयं सेवक समूह सदस्यों से बातचीत की। ये विद्यार्थी इन प्रोजेक्टस की वीडियोग्राफी सहित फोटोग्राफ भी ले रहे हैं।
तितरम में उन्होंने आशा वर्कर्स के काम काज की जानकारी जुटाई। कैसे आशा वर्कर प्रसव में महिलाओं के लिए सहयोगी बनीं हुई हैं और सरकार की इस योजना से लोगों को कैसे लाभ पहुंच रहा है। सभी विद्यार्थी अपने-अपने प्रोजेक्ट पर अगले दस दिनों तक शोध करेंगे। इनके साथ संभव संस्था के वोलंटियर्स भी रहे। जो लोगों व विद्यार्थियों के बीच दुभाषिये की भूमिका निभा रहे हैं। ताकि उन्हें चीजों को समझने में परेशानी ना हो।