संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंगलवार से चैत्र नवरात्र आरंभ हो रहे हैं। सोमवार को बाजार में रौनक रही। मुख्य बाजारों में पूजन सामग्री के साथ-साथ अन्य जनरल स्टोर पर लोगों ने खरीदारी पूजा अर्चना का सामान खरीद रहे हैं। मंदिरों को रंगीन लाइटों व फूलों के साथ भव्य तरीके से सजाया गया। कलश स्थापना का शुभ समय 07ः32 से 10ः32 बजे व अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11ः57 से 12ः48 तक है।
शहर के चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, कोठी देवी मंदिर, बड़ी देवी मंदिर, हनुमान वाटिका स्थित देवी मंदिर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजारों में भी सोमवार को लोग नवरात्र के लिए खरीदारी करते नजर आए। लोगों ने पूजा-पाठ पंचमेवा, रूई, रोली, सिंदूर, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, आरती की थाली, जौ, तिल के अलावा शृंगार के सामान की खरीदारी की।
श्री हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र को लेकर महिलाएं नौ अप्रैल से नवमी तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगी। वहीं अन्य मंदिरों में सुबह व शाम को पूजन किया जाएगा। नौ अप्रैल को व्रत करने वाले अपने घर में कलश स्थापित करेंगे और मां भगवती का पूजन करेंगे।
उधर, माता गेट पर ऐतिहासिक सूर्यकुंड डेरे में स्थित काली माता का मंदिर में रविवार रात से तीन दिवसीय मेले की शुरूआत हुई थी। इसके बाद सोमवार सुबह से ही मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे। मेले के पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंच पूजा-अर्चना कर शीश नवाया।
श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर मां काली के दरबार में माथा टेका और मनोकामनाएं मांगी। मेले को पुलिस की ओर से भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 50 से अधिक पुलिसकर्मी व 200 सेवादारों को व्यवस्था बनाने के लिए लगाया गया था। इस दौरान सीवन गेट से माता गेट और हिंद सिनेमा से माता गेट जाने वाले रास्ते को पूरी तरह से बंद किया गया था।
मान्यता के अनुसार, सूर्यकुंड डेरे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यह कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में आता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार महाभारत काल में ज्येष्ठ पांडव पुत्र युधिष्ठिर ने कैथल में ही नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी। इनमें से सबसे बड़ा कुंड माता गेट पर सूर्यकुंड के नाम से स्थापित किया गया था।
वहीं, यहां पर स्थित काली माता के मंदिर को बाजीगर समाज की कुलदेवी माना जाता है। इसलिए चैत्र मास की अमावस्या व पहले नवरात्र पर यहां पर भव्य मेला आयोजित किया जाता है। मंदिर परिसर के बाहर यहां पर झूले लगाए गए। जबकि मंदिर के अंदर मेले को दुकानें सजाई गई। डेरा परिसर में स्थित काली माता मंदिर की काफी मान्यता है।
महंत रमनपुरी ने बताया कि सूर्यकुंड के साथ यहां पर माता शीतला व माता काली का मंदिर है। भगवान शिव का मंदिर भी यहां है। महाभारत काल को प्रदर्शित
करती एक गुफा भी है। उपवन में कई तरह के फलों, फूलों और औषधियों के पौधे लगाए हैं।