। ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन कर्ताओं के लिए अब फर्स्ट एड सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया है। जिसके आधार पर वाहन चालक अब प्राथमिक उपचार का भी प्रशिक्षण लेंगे। ये सुविधा लॉकडाउन से पहले ही शुरू हो चुकी थी। लेकिन लॉकडाउन के दौरान सरकारी कार्यालयों में पब्लिक डीलिंग बंद थी। जैसे ही अनलॉक शुरू हुआ तो इस दिशा में काम-काज के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई।
अधिकारियों का कहना है कि विभाग द्वारा 45 साल बाद इस शर्त को लागू किया है। पहले सिर्फ कंडक्टर लाइसेंस के लिए ही फर्स्ट एड सर्टिफिकेट अनिवार्य था लेकिन अब विभाग द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भी शुरू किया है।
बता दें कि कंडक्टर का लाइसेंस बनवाने के लिए पहले रेड क्रॉस सोसाइटी से फर्स्ट एड सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। उसके बाद इस प्रमाण पत्र के साथ आवेदक का फोटो, मेडिकल, परिचालक लाइसेंस का आवेदन और फीस जमा करवानी होती है। वहीं पर फोटो खिचवाना पड़ता है, जिसके बाद परिचालक का लाइसेंस जारी होता है।
पांच साल के लिए बनता है लाइसेंस: कंडक्टर का लाइसेंस पांच साल तक मान्य होता है। इसके बाद उसको रिन्यू करवाना पड़ता है। अब पुराना लाइसेंस भी आरटीए विभाग द्वारा रिन्यू किया जाएगा। रिन्यू करवाने के लिए आवेदक 10वीं कक्षा की अंक तालिका की फोटो कॉपी, आधार कार्ड, एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी किया गया असली परिचालक लाइसेंस व एनओसी को आरटीए कार्यालय में जमा करवाना होगा। फिर कंडक्टर लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसी आधार पर लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भी फर्स्ट एड सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया है।
जिला रेडक्रॉस सोसायटी कार्यालय में लगेंगी दो घंटे क्लासें- विभागीय अधिकारी ईलम सिंह व डीएल इंचार्ज विक्रांत ने बताया कि विभाग के आदेशों के बाद कंडक्टर लाइसेंस के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस में भी फर्स्ट एड सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले आवेदक को उक्त सर्टिफिकेट बनाना अवश्य है। आवेदक को अपनी दसवीं की मार्कशीट, आधार कार्ड, वोटर आईडी सहित दो फोटो भी साथ लगानी है।