संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। नीमा (नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन) स्थानीय इकाई की बैठक रविवार को कलायत में हुई। बैठक में संगठन को मजबूती देने, समाज में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार और सामाजिक सेवा पर विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इस दौरान सर्वसम्मति से डाॅ. मदन परमार को प्रधान चुना गया।
इसके साथ ही संरक्षक की कमान डाॅ. सुरेश जगदेवा, वरिष्ठ उपप्रधान डाॅ. बाबूराम यादव, चीफ मीडिया कोर्डिनेटर डाॅ. राजेश मौण, कोषाध्यक्ष डाॅ. निशा और महासचिव डाॅ. इंदु को चुना गया। पदाधिकारियों के नामों के चयन का प्रस्ताव डाॅ. वीना छाबड़ा, डाॅ. राजेंद्र छाबड़ा, डाॅ. आशीष, डाॅ. राजेश और डाॅ. राकेश शर्मा ने विमर्श के बाद रखा। इस पर सभी ने सहमति की मुहर लगाई।
बैठक के दौरान समय-समय पर जरूरतमंदों के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविरों के आयोजन का निर्णय लिया गया। ताकि आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ आमजन तक पहुंचाया जा सके। बैठक का एक महत्वपूर्ण बिंदु व आज के समय में बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) भी रहा।
सभी सदस्यों ने इस पर विचार साझा किए और आयुर्वेद को विज्ञान सम्मत ढंग से प्रस्तुत करते हुए आमजन का विश्वास बढ़ाने पर फोक्स किया। डाॅ. सुरेश जगदेव ने कहा कि नीमा संगठन न केवल चिकित्सकों का मंच है, बल्कि यह समाज सेवा का एक सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे सामाजिक स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक से अधिक भागीदारी निभाएं।
बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में नीमा कलायत की गतिविधियां और भी अधिक प्रभावशाली रूप लेंगी। बैठक में कलायत क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे गैर-पंजीकृत मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों के मुद्दे पर चर्चा हुई।
इसमें यह सामने आया कि अनेक ऐसे व्यक्ति जो किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति के पंजीकृत चिकित्सक नहीं हैं। बावजूद इसके बड़े पैमाने पर साइन बोर्ड लगाकर मल्टी स्पेशलिटी क्लीनिक चला रहे हैं। इन संस्थानों में लोगों को गुमराह किया जा रहा है। साथ ही जन स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। सदस्यों ने इसे साफ-साफ मेडिकल एथिक्स और कानून का उल्लंघन बताया।
और सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि नीमा संगठन प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग एवं स्थानीय निकायों से मिलकर ऐसे फर्जी अस्पतालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग करेगा।
डाॅ. मदन परमार ने कहा कि नीमा संगठन का दायित्व है कि वह न केवल आयुर्वेद पद्धति का प्रचार-प्रसार करे बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने में भी अग्रणी भूमिका निभाए। यह भी स्पष्ट किया कि संगठन इस दिशा में कोई समझौता नहीं करेगा और प्रशासनिक स्तर पर सभी जरूरी कदम उठाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एक स्थायी निगरानी समिति बनाई जाएगी जो समय-समय पर ऐसे फर्जी संस्थानों की पहचान करेगी और प्रशासन को लिखित में सूचित करेगी। साथ ही जनहित याचिका दायर करने जैसे कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया गया।