संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। साइबर अपराधियों ने ठगी करने का एक नया तरीका निकाला है। इसे वॉइस क्लोनिंग ठगी कहा जाता है। इसमें अपराधी आवाज को क्लोन करने के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं और पीड़ितों को ये भरोसा दिलाया जाता है कि वे मुश्किल में फंसे अपने परिजनों या बच्चों से बात कर रहे हैं। इसके झांसे में आकर नागरिक ठगी का शिकार हो जाते हैं।
एसपी उपासना ने कहा कि वॉइस क्लोनिंग ठगी से बचने के लिए सबसे पहले सतर्कता जरूरी है। ठगी करने के लिए अपराधी प्रियजनों की आवाज से भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाते हैं। आप हमेशा इंक्वायरी करने वाले प्रश्न पूछकर या उससे जुड़े किसी अधिकारी से संपर्क कर कॉल करने वाले की पहचान का सत्यापन करें। बिना कॉलर वेरिफिकेशन के कोई भी कार्य करने से बचें। वित्तीय लेनदेन करने में सावधानी रखें। बैंक संबंधित जानकारी किसी से भी साझा न करें।
समझाया कि फोन पर किसी भी प्रकार की संवेदनशील जानकारी साझा न करें। वॉइस क्लोनिंग के बारे में खुद को और अपने प्रियजनों को शिक्षित करें। किसी भी संदिग्ध कॉल या धोखाधड़ी वाली गतिविधियों की रिपोर्ट साइबर हेल्पलाइन 1930 और नजदीकी पुलिस स्टेशन में करें। एसपी ने कहा है कि सतर्क रहकर और सक्रिय उपाय अपनाकर, व्यक्ति वॉयस क्लोनिंग ठगी से बच सकता है।