कैथल। हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन (एचसीएमएस) के बैनर तले शनिवार को सरकारी अस्पताल में चिकित्सकाें ने मांगों के समर्थन में दो घंटे की हड़ताल की। इस दौरान अस्पताल पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। बड़ी संख्या में मरीज बिना चिकित्सकीय जांच और उपचार के बैरंग लौट गए। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ी। कारण कि हर माह की नौ तारीख को लगने वाले विशेष शिविर के लिए बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं जांच और उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों में पहुंची थीं।
विभिन्न मांगों के समर्थन में शनिवार को सरकारी चिकित्सकों की दो घंटे की हड़ताल मरीजों पर भारी पड़ी। स्थिति यह रही कि प्रतिदिन ओपीडी में जहां एक हजार से अधिक मरीजों का उपचार होता था, वहीं हड़ताल के कारण यह संख्या 500 से कम रही। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत जिलों के सरकारी अस्पताल में हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया जाता है, जिसमें पहुंची महिलाओं को अधिक परेशानी झेलनी पड़ी। नागरिक अस्पताल के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सक भी दो घंटे तक ओपीडी से दूर रहे।
हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन के प्रधान सचिन मांडले ने बताया कि एसोसिएशन की राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर शनिवार को दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल की गई। इसके बाद भी अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इस मौके पर उनके साथ डॉ. राजीव मित्तल, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. कविता गोयल, डॉ. आशीष सहित अन्य चिकित्सक मौजूद थे।
बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचा, बैरंग लौटा
जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचे सेक्टर-19 निवासी शमशेर सिंह ने बताया कि उसके बच्चाें का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र स्कूल वालाें ने मांगा है। इसलिए वह शनिवार को अस्पताल आया था, लेकिन चिकित्सकों की हड़ताल के चलते बच्चों की किसी भी प्रकार की कोई जांच नहीं हो पाई है। ऐसे में उसे बैरंग लौटना पड़ा।
बुखार होने पर पहुंचा था, निजी अस्पताल का किया रुख
शहर निवासी बालक वीनू ने बताया कि उसे बुखार की शिकायत है। इसके बाद वह शनिवार सुबह नौ बजे ही अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच गया था, लेकिन यहां आकर जानकारी मिली कि चिकित्सक ओपीडी में नहीं बैठे हैं। इस कारण उसका इलाज नहीं हो पाया। उसे मजबूरन निजी अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ा।
चिकित्सकाें की यह हैं मांगें-
- गतिशील सुनिश्चित करियर प्रगति (एसीपी) योजना लागू करना।
- एसएमओ की सीधी भर्ती पर तुरंत रोक लगाना।
- चिकित्सकों के लिए एक विशेषज्ञ कैडर का गठन करना।
- पीजी के लिए बान्ड राशि एक करोड़ से 50 लाख रुपये किए जाना।
- ग्रामीण क्षेत्रों को दूरस्थ घोषित कर पीजी कोटा बहाल करना।
- चिकित्सकाें के लिए पीजी कोटा।
- स्पेशलिस्ट के लिए अतिरिक्त इंसेटिव।
- चिकित्सक की 10 साल में पदोन्नति।
- जल्द पीजी पाॅलिसी बनाने की मांग।