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Kaithal News: डॉक्टरों की हड़ताल, परेशान हुए मरीज-तीमारदार

Fri, 26 Jul 2024 03:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिलेभर के सरकारी अस्पताल के चिकित्सक हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर मांगें पूरी न होने के विरोध में वीरवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। इसके साथ ही नर्सिंग ऑफिसर ने भी दो घंटे तक हड़ताल की। उनकी हड़ताल सुबह आठ बजे शुरू हुई जो 10 बजे तक जारी रही। हड़ताल के कारण सुबह के समय अस्पताल में पहुंचे मरीजों को दिक्कतें झेलनी पड़ी।

इस हालात में एनएचएम के चिकित्सकों ने ओपीडी संभाली। उन्होंने मरीजों का इलाज शुरू किया। वहीं, नर्सिंग ऑफिसर ने भी सुबह के समय दो घंटे तक हड़ताल की। जिला नागरिक अस्पताल में 16 में 12 चिकित्सक सामूहिक छुट्टी पर रहे और हड़ताल की।
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सुबह 10 बजे से पहले बेशक ओपीडी में चिकित्सक बैठे, लेकिन इस दौरान नर्सिंग ऑफिसर की हड़ताल के कारण लैब के सैंपल नहीं हो पाए। हड़ताल के दौरान सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने स्वयं ही पीएमओ कार्यालय में मौके पर पहुंच अस्पताल में व्यवस्थाएं बनाने का काम किया। इस दौरान वह दोपहर तक अस्पताल में ही मौजूद रहीं।

जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचे एक दंपति को जब देर तक इधर-उधर घूमने पर भी इलाज नहीं मिला तो वे थककर नीचे जमीन पर ही बैठ गए। बुजुर्ग दंपती ने कहा एक तो बुढ़ापा ऊपर से इलाज नहीं हो पाया। इस कारण वह परेशान हुए।

परेशान मरीज बोले ः अपनी पत्नी को नागरिक अस्पताल में पहुंचे सिरटा निवासी विनोद ने कहा कि वे अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आये थे। यहां आकर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर गए है। फिलहाल अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। पहले काफी समय तक इंतजार किया, जब इलाज नहीं मिला तो वापस जाना पड़ा। वहीं जिला नागरिक अस्पताल में पहले से ही दाखिल नंद सिंह खेड़ा निवासी गोपी सिंह ने बताया कि वह दो दिन से अस्पताल में दाखिल है। उसे वीरवार को दोपहर तक केवल एक इंजेक्शन दिया गया है। चिकित्सकों की हड़ताल की जानकारी मिली। ऐसे में सुबह लेकर दोपहर तक कोई भी चिकित्सक भी जांच के लिए नहीं पहुंचा और न ही कोई दवा दी।

ये बोले संगठन के प्रधान ः हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. ललित जांगड़ा ने कहा कि पिछले कई महीनों में सरकार ने विभिन्न मांगों से संबंधित बार-बार आश्वासन दिए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया है। इसलिए एसोसिएशन की राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर ओपीडी, आपातकालीन, पोस्टमार्टम सहित स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया। कहा कि एक महीने पहले सरकार को चेताया था कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो वे 25 जुलाई से सभी सेवाएं बंद करने के लिए मजबूर होंगे। अब यदि आगे कोई नतीजा नहीं निकलता है, तो हमारी हड़ताल अनिश्चित काल तक जारी रहेगी। डॉ. ललित जांगड़ा ने बताया कि हमारी 4 मुख्य मांगें हैं, जिनमें पीजी बॉन्ड 50 लाख से कम करना और एसएमओ की सीधी भर्ती नहीं करने की है। इसके साथ ही एसीपी और भत्ते केंद्र सरकार के बराबर देने और विशेषज्ञ डॉक्टरों को अलग से कैडर बनाने की मांग है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विधानसभा में अलग से कैडर बनाने की घोषणा की थी। सरकार ने स्वीकृति मिलने के बाद इसकी फाइल अफसरों के टेबल पर घूम रही है।

जिले में चिकित्सकों की है भारी कमी ः इस समय जिले में चिकित्सकों की भारी कमी है। ऐसे में जिले के सरकारी अस्पतालों में 149 चिकित्सकों के पद है, जिन पर महज 43 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। सिविल अस्पताल में रोजाना 1200 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। वहीं, जिले के सीएचसी व पीएचसी लेवल पर औसतन 3300 के करीब ओपीडी होती है। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीज इलाज के लिए तरस रहे हैं। काफी समय से चिकित्सकों के रिक्त पद नही भरे गए।
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हड़ताल के चलते एनएचएम के तहत लगे डॉक्टरों को ड्यूटी पर लगाया गया। इसके तहत किसी भी प्रकार की परेशानी मरीजों को नहीं हुई। सुबह के समय नर्सिंग ऑफिसर ने भी दो घंटे तक हड़ताल की है। इसी समय ही कुछ परेशानी मरीजों को हुई। -डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन
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