जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की कमी जांच व इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। अस्पताल में डॉक्टरों के 55 पद स्वीकृत हैं, लेकिन उनमें से केवल 23 पदों पर ही डॉक्टर तैनात हैं। जो डॉक्टर अस्पताल में हैं, उन पर भी इमरजेंसी, ओपीडी और कोविड राहत कार्यों व प्रशासनिक कार्यों सहित कई कई कार्यभार दिए गए हैं। ऐसे में डॉक्टर ओपीडी को पूरा समय नहीं दे पाते हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए लाइनों में लगकर घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। घंटों ओपीडी के बाहर इंतजार करने के बाद भी कई बार तो जांच व इलाज संबंधित कार्य नहीं हो पा रहे हैं। अन्य स्टाफ को लेकर भी शुरूआत से ही समस्या बनी हुई है।
बेहोशी वाला डॉक्टर है ही नहीं :-
अस्पताल में बेहोशी वाला कोई डॉक्टर नहीं है। इमरजेंसी में अगर कोई आपरेशन करना पड़ जाए या फिर किसी महिला की सीजेरियन डिलीवरी हो तो कोई बाहर से ही डॉक्टर बुलाना पड़ता है। सर्जन का भी एक पद खाली पड़ा है। हालांकि अस्पताल में 23 के अलावा सात अन्य डॉक्टर दिखाए जा रहे हैं, लेकिन पिछले काफी कई महीनों से वे अनुपस्थिति चल रहे हैं। न तो उनके द्वारा कोई रिजाइन दिया गया है और न ही ड्यूटी पर आ रहे हैं। ऐसे में उनके पद भी एक प्रकार से खाली पड़े हैं।
44 पदों पर नर्स नही : नागरिक अस्पताल में नर्सों के कुल 90 पद स्वीकृत हैं, लेकिन उनमें से केवल 46 पदों पर ही नर्स तैनात हैं। 44 पद खाली पिछले काफी समय से खाली पड़े हैं। ऐसे ही हालात रेडियोलॉजिस्ट, रेडियोग्राफ और एलटी को लेकर बने हुए हैं। इस समय अस्पताल में कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। अस्पताल में मशीन तो है, लेकिन उसे चलाने वाला नहीं है। ऐसे में लोगों को अल्ट्रासाउंड भी अस्पताल के बाहर से करवाने पड़ते हैं। प्राइवेट सेंटर में मरीजों अतिरिक्त रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। रेडियोग्राफर के छह स्वीकृत पदों में पांच खाली पड़े हैं। वहीं एलटी के 14 पदों में ये सात पर टेक्रिशियन नहीं है।
स्टाफ की कमी से बढ़ी मरीजों की परेशानी : डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की कमी के कारण मरीजों का धन और समय दोनों बर्बाद हो रहे हैं। जब एक दिन इंतजार के बाद भी जांच या इलाज नहीं हो तो उन्हें दूसरे दिन फिर से अस्पताल में आना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को तो दिक्कतें और भी ज्यादा रहती है, क्योंकि उन्हें पहले वाहनों का किराया वहन करना पड़ता है और साथ में अपने काम छोड़कर चक्कर काटने पड़ते हैं।
गांव तितरम से आंखों की जांच करवाने के लिए अस्पताल पहुंची महिला कृष्णा देवी ने कहा कि वह पिछले करीब पौने घंटे से ओपीडी के बाहर इंतजार कर रही है। यहां पता चला है कि डॉक्टर किसी दूसरे कार्य में लगे हुए हैं। यह भी नहीं पता कि कितनी देर और इंतजार करना पड़ेगा।
गांव नौच से अस्पताल में सिर और आंखों से संबंधित जांच करवाने पहुंची जीतो देवी ने बताया कि वह सुबह 10 बजे के करीब अस्पताल में आई थी। पहले पर्ची कटवाने के लिए लाइनों में लगना पड़ा और अब जांच के लिए इंतजार कर रही है। कब डॉक्टर आएंगे कोई पता नहीं है।
सिविल सर्जन डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के बारे में विभाग के मुख्यालय को हर माह पत्र लिखा जा रहा है। फिलहाल मौजूदा डॉक्टरों से ही काम चलाया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से समस्या के समाधान को लेकर लगातार अधिकारियों को अवगत करवाया जा रहा है।