तीमारदारों का कहना हैं कि रात होते ही अस्पताल की सुविधाएं लगभग बंद हो जाती हैं। रात के समय डॉक्टर वार्डों में भर्ती मरीजों को देखने के लिए राउंड पर नहीं आते। नर्स और क्लास फोर कर्मचारी ही मरीजों की देखरेख करते हैं। गंभीर मरीजों के परिजन पूरी रात जागकर खुद ही निगरानी करने को मजबूर हैं। डॉक्टरों रात के राउंड के लिए नॉन प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाता है, ताकि वे मरीजों की नियमित निगरानी कर सकें। राउंड नहीं लग रहे हैं। सिविल सर्जन डा. रेनू चावला ने बताया कि वह इस बारे में जांच कराएंगी।
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रात के समय कोई डॉक्टर देखने नहीं आता
तीमारदार अमित ने बताया कि उनके परिवार का एक सदस्य अस्पताल में भर्ती है, लेकिन रात के समय कोई डॉक्टर देखने नहीं आता। उन्होंने कहा कि कई बार नर्स भी समय पर वार्ड में नहीं पहुंचती, जिससे मरीजों को दवा या इंजेक्शन समय पर नहीं मिल पा रहें हैं। मजबूरी में सहायक कर्मचारी ग्लूकोज की बोतल बदलते हैं। तीमारदार करण ने अस्पताल में भर्ती परिवार के सदस्य की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि रात के समय राउंड के दौरान नर्स अस्पताल में नहीं आती हैं, जिससे मरीज को आवश्यक उपचार और देखभाल नहीं मिल पा रहीं हैं ।