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Kaithal News: आग लगाने वाले किसानों को न दें योजनाओं का लाभ

Sat, 07 Oct 2023 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। लघु सचिवालय स्थित सभागार में शुक्रवार को हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने पराली प्रबंधन विषय पर अधिकारियों की बैठक ली। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे किसानों का डाटाबेस तैयार किया जाए, जो कि हर साल बार-बार अपने खेतों में पराली को जलाते हैं। भविष्य में इन्हें सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण सभी के लिए हानिकारक है, इसलिए इसे रोकना हमारी सांझी जिम्मेदारी है। पराली प्रबंधन के लिए सरकार की ओर से किसानों के लिए अनेकों योजनाएं लागू की गई है, जो किसान पराली प्रबंधन करता है, उसकी आय में भी बढ़ोतरी होती है। उन्होंने कहा कि जिला में अगर औद्योगिक इकाइयां भी वेस्ट में आग लगाती हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाए।
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उन्होंने कहा कि जिले में गठित कमेटियां निरंतर क्षेत्र में रहकर आग लगाने की घटनाओं पर अंकुश लगाएं, वहीं किसानों को निरंतर जागरूक भी करते रहे। कई किसानों ने पराली प्रबंधन करके धनराशि अर्जित करके अपना नाम कमाया है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में नॉन बासमती की फसल लगी है, वहां पर विशेष निगरानी रखी जाए, क्योंकि उन्हीं क्षेत्रों में पराली में आग लगाने की घटना का अंदेशा रहता है।

चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने पराली उत्पादन व खपत की फीडबैक लेते हुए कहा कि पराली को भट्ठों में इस्तेमाल करने की संभावनाओं को तलाशा जाए। जो किसान पराली जलाने की घटना में संलिप्त पाया जाता है तो जुर्माने के साथ-साथ उसका नाम भी उजागर किया जाए। जो कर्मचारी पराली प्रबंधन के क्षेत्र में अच्छा कार्य करवाता है तो उसे सम्मानित करने का कार्य किया जाए। इन सीटू मैनेजमेंट से पराली प्रबंधन अधिक से अधिक हो। इस व्यवस्था से जमीन की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि उनके पूर्व के अनुभव हैं, उन्हें एक रिपोर्ट के रूप में भिजवाएं, ताकि भविष्य की योजना तैयार की जा सके, जिससे पराली में आग लगाने की घटनाओं को बिल्कुल रोका जा सके।

डीसी प्रशांत पंवार ने जिला में पराली प्रबंधन को लेकर किए गए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट चेयरमैन पी राघवेंद्र राव के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जिला को आठ कलस्टरों में विभाजित किया गया है। हर कलस्टर में एचसीएस अधिकारियों के साथ टीमों की नियुक्ति की गई है। गठित टीमें निरंतर क्षेत्र में जाकर किसानों को जागरूक कर रही है। जिला में पराली में आग लगाने की घटनाओं की जानकारी के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जिनके नंबर 93502-24182, 93062-28234 हैं। कोई भी नागरिक इस पर पराली जलाने की घटनाओं की सूचना दे सकता है। उन्होंने कहा कि 10 किसानों की क्षेत्र में जाकर तथा सात किसानों के जुर्माने सैटेलाईट से आई रिपोर्ट के आधार पर किए गए हैं। भविष्य में भी अगर कोई किसान इस तरह का कार्य करेगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इस अवसर पर एसडीएम कपिल कुमार, कृष्ण कुमार व देवेंद्र शर्मा, आरटीए गिरिश अरोड़ा, डीडीपीओ कंवर दमन, तहसीलदार अनिल बिढ़ान, डीडीए महावीर सिंह, आरओ पोल्यूशन पूनम लांगयान, बीडीपीओ कंचन लता, अन्नू टोंक, अशोक मेहरा व नरेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार आशीष, सुनील कुमार, रामजी लाल व सतीश नारा मौजूद रहे।
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पराली में आग नहीं लगाकर करें प्रबंधन का कार्य

सांसद नायब सिंह सैनी ने किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए पराली में आग नहीं लगाए, बल्कि उसका प्रबंधन करके उसे अपनी आय का जरिया बनाए। सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के लिए अनेक योजनाओं के साथ-साथ किसानों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ-साथ किसानों को अनुदान पर पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र भी दिए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण करना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है, इसलिए किसानों को चाहिए कि प्रशासन का सहयोग करते हुए जिला को पराली जलाने की घटनाओं से पूरी तरह से मुक्त करें।
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