ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर जिले में 14 प्वाइंट से घग्गर नदी में जाने वाली ड्रेनों में डाले जाने वाले सीवरेज के पानी को बंद किया जाएगा। इस पानी को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में ले जाया जाएगा। इसके बाद या तो इसे किसानों के लिए खेतों में प्रयोग किया जाएगा या फिर ट्रीट करके फिर ड्रेन में डाला जाएगा। अगले एक सप्ताह में इसकी एक्शन रिपोर्ट बनाकर विभाग को भेजी जाएगी। यह निर्णय जिला म्यूनिसिपल कमीश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। जिसमें कैथल नगर परिषद, कलायत, गुहला-चीका, पूंडरी और राजौंद नगर पालिकाओं के अधिकारियों ने भाग लिया।
डीएमसी कुलधीर सिंह की अध्यक्षता में नगर परिषद भवन में हुई बैठक में ईओ कैथल नगर परिषद अशोक कुमार, गुहला से एमई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ, जनस्वास्थ्य व पब्लिक हेल्थ से एक्सईएन व अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। डीएमसी ने कहा कि कैथल नगर परिषद के 11 प्वाइंट ऐसे पाए गए हैं, जहां से ग्योंग ड्रेन, मानस ड्रेन व कैथल ड्रेन में सीवरेज का पानी डाला जा रहा है। अंतत: यह सारा पानी एकत्रित होकर घग्गर नदी में जाता है। इसी प्रकार से गुहला में तीन प्वाइंट ऐसे हैं, जिनका पानी एकत्रित होकर घग्गर नदी में जाता है। जबकि एनजीटी के आदेश हैं कि किसी भी सूरत में सीवरेज का पानी नदियों में नहीं जाएगा। इसीलिए कैथल नगर परिषद व गुहला नगर पालिका के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि घग्गर नदी में सीवरेज का पानी किसी भी सूरत में ना जाए। ईओ कैथल ने बताया कि कैथल में सभी 11 प्वाइंट से पानी को रोक कर मानस रोड, खुराना रोड व जींद रोड स्थित एसटीपी में डाला जाएगा। वहां से ट्रीट होने के बाद जरूरत अनुसार प्रयोग किया जाएगा।