कैथल। चंदाना गांव निवासी साइकिल चालक दिव्यांक राणा ने दृढ़ संकल्प और गो ग्रीन स्टे लीन वाक्य को सार्थक करते हुए दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य दर्रे उमलिंग ला को फतेह किया है। राणा ने 19 मार्च को कैथल से फरीदाबाद जाकर वहां से लेह तक एक असाधारण साइकिल यात्रा शुरू की थी। उन्होंने 2023 में दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क, उमलिंग ला दर्रा पर चढ़ने वाले हरियाणा के पहले साइकिल चालक के रूप में अपना स्थान बनाया है।
गौरतलब है कि उमलिंग-ला दर्रा दुनिया की सबसे ऊंची सड़क मानी जाती है। यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के पूर्वी भाग में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास लेह से करीब 230 किमी दूर कोयुल लुंगपा और सिंधु नदी के बीच की सीमा पर यह सड़क है। यह दर्रा समुद्र तल से 19,024 फीट अर्थात 5,883 मीटर ऊंचाई है।
दिव्यांक ने बताया कि उसने 27 जून को सुबह 6:50 बजे चढ़ाई शुरू की थी। 13 घंटे और 45 मिनट की अवधि में 82.5 किमी की कठिन दूरी तय करने के बाद उमलिंग ला दर्रे पर पहुंच गया। रास्ते में उसने 2700 मीटर की प्रभावशाली ऊंचाई को पार किया और 18,124 फीट की ऊंचाई पर स्थित दर्रे फोटिला पर विजय प्राप्त की। उसके बाद उसे कई खूबसूरत और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होकर आगे जाना पड़ा।
स्नातक के छात्र दिव्यांक का अटूट निश्चय उन्हें छितकुल ले गया, जो भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित भारत के आखिरी गांव के रूप में मशहूर है। वहां से रिकांग पियो, स्पीति घाटी, काजा और कोमिक (दुनिया का सबसे ऊंचा गांव) से गुजरते हुए अपनी यात्रा जारी रखी। दुनिया के सबसे ऊंचे डाकघर के लिए मशहूर गांव हिक्किम की कठिन चुनौतियों और कुंजुम दर्रे की कठिन यात्रा करते हुए दिव्यांक ने फोटिला दर्रा और उमलिंग ला दर्रा दोनों पर विजय प्राप्त कर साइकिल का सफर समाप्त किया।
दिव्यांक ने कहा कि अब वह नए क्षितिज पर अपनी नजरें गड़ाए है। दिव्यांक ने अज्ञात क्षेत्रों का पता लगाने, मौजूदा रिकॉर्ड तोडऩे और दो पहियों पर जो संभव माना जाता है उसकी सीमाओं को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है।