जिला अस्पताल में सोमवार को दिन भर मरीजों का इलाज के लिए घमासान मचा रहा। सोमवार को वैसे ही ओपीडी ज्यादा रहती है। वहीं नवनियुक्त जेबीटी अध्यापकों के मेडिकल के कारण मरीज व अध्यापक अपनी रिपोर्ट्स के लिए भटकते रहे। डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में 55 डॉक्टरों की जरूरत पर महज 12 डॉक्टरों से काम चल रहा है। जिस कारण सोमवार को लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पर्ची कटवाने के बाद करना पड़ा घंटों का इंतजार
अस्पताल पहुंचकर पर्ची कटवाने के बाद मरीजों को डॉक्टर से मिलने के लिए दो से तीन घंटों का इंतजार करना पड़ा। सामान्य वार्ड, आंखों, नाक, कान व गले सहित सभी वार्डों के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ी रही। भीड़ का आलम यह था कि एक वार्ड से दूसरे वार्ड की लाइन में जाने के लिए भी रास्ता नहीं मिला। डॉक्टरों के कमरों के बाहर 200 से 300 मरीज बाहर लंबी-लंबी कतारों मेें लगे रहे। जिसके कारण वह अस्पताल में बीच में फर्श पर बैठकर डॉक्टर के चेकअप करने का इंतजार करते रहे।
सुबह सात बजे से लगे है लाईन में, अभी तक नहीं मिला इलाज
बुजुर्ग महिला संतरो देवी, बिमला, सुनैना ने बताया कि वह सुबह सात बजे की लाइनों में खड़ी है। पहले पर्ची के लिए, इसके बाद डॉक्टरों के कमरों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई थी। महिलाओं ने बताया कि 11 बज चुके हैं। अभी तक उनका नंबर नहीं आया है। बुजुुर्ग महिलाओं ने बताया कि डॉक्टर से इलाज लेने के बाद अगले दो घंटे के लिए दवा की लाइन में लगना है। बीमार होने के कारण उनका लाइन में खड़ा होना बहुत कठिन है।
हंगामे के बीच बुलानी पड़ी पुलिस
अस्पताल में मेडिकल करवाने के लिए आए सैकड़ों जेबीटी टीचरों को डॉक्टर रूम के आगे लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। उन्हें हर वार्ड में जाकर रिपोर्ट करवानी पड़ी। लाइनों में खूब धक्का-मुक्की हुई इससे हंगामा हो गया। इसी बीच अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था पर काबू पाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद सामान्य तरीके से मेडिकल और लोगों का इलाज करवाया गया।
यहां नहीं थी पांव रखने की जगह
अस्पताल में आंखों के चेकअप रूम, स्किन, कान, गला, ईसीजी, एक्सरे रूम, ब्लड चेकअप रूम के बाहर सैकड़ों की संख्या में महिलाओं व पुरुषों की अलग-अलग लाइनें लगी रही। जिसके कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जेबीटी टीचरों के मेडिकल बनाने में कारण दिक्कत आई है। जेबीटी टीचरों के नियुक्ति के बाद मेडिकल के लिए बोर्ड बनाया हुआ है। ओपीडी अधिक होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों की कमी है।
डॉ. मनीष बंसल, सीएमओ