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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से बेचा जा रहा है खून!

Thu, 09 Mar 2017 12:56 AM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
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ब्लड बैंक में रखे खून के स्टॉक में भारी गड़बड़ी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में जो जांच चल रही है, यदि वह सही साबित हुई तो यह मानवता को कलंकित करने से कम नहीं होगा। यहां लोगों द्वारा दान दिए गए खून को बेचने की बात सामने आई है। जिस पर विभाग ने एसआईटी का गठन कर जांच शुरू कर दी है। मरीजों के नाम फर्जीवाड़ा करते हुए ब्लड बैंक से ब्लड की यूनिट इश्यू करवाकर उन्हें ठिकाने लगाकर इस कृत्य को अंजाम दिया जा रहा है। सिविल सर्जन डा. मनीष बंसल के आदेश पर यह जांच चल रही है।
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फर्जी ब्लड यूनिट इश्यू करवाकर बाजार में बेचे जाने की आशंका
विभागीय सूत्रों ने बताया कि ब्लड बैंक में कार्यरत कुछ कर्मचारी एवं अधिकारी मिलीभगत करके ब्लड बैंक से फर्जी रक्त इश्यू करवाते थे। जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं व अन्य लोगों की फाइल से उसका नंबर एवं नाम पता कर ब्लड बैंक से उसी नाम से रक्त की यूनिट निकलवा लेते थे। रिसीवर की जगह अपने ही फर्जी हस्ताक्षर करके ब्लड की उस यूनिट को उक्त मरीज को चढ़ाने की बजाए बाजार में बेच दिया जाता था। जब इस बात का फौरी तौर पर खुलासा हुआ तो विभागीय अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक माह में करीब 20 से 25 यूनिट रक्त इसी तरह बाजार में जा रहा था। जिसे प्रति यूनिट 2500 से लेकर इमरजेंसी में 5000 रुपये तक में बेचा जाता है।

सीएमओ ने पकड़ा मामला
विभागीय सूत्रों ने बताया कि यहां आए स्टाफ सदस्यों को जब इस बारे में पता चला तो मामला सीएमओ तक पहुंचा। सीएमओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए। डा. देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जिसमें डा. चावला को भी शामिल किया गया है। साथ ही कुछ कर्मचारी जांच दल में शामिल हैं।
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खंगाला जा रहा है रिकॉर्ड
विभागीय सूत्रों ने बताया कि ब्लड बैंक से पिछले छह माह में इश्यू हुए रक्त सहित जिला अस्पताल में जिन मरीजों को रक्त चढ़ाया गया है, उनका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि एक माह में करीब 20 से 25 यूनिट का फर्जीवाड़ा निकला है। शीघ्र ही यह जांच पूरी हो सकती है।

आशंका सच साबित हुई तो मानवता कलंकित करने का मामला
विभाग में जो जांच चल रही है। यदि यह सच साबित हुई तो यह मानवता को कलंकित करने वाला मामला होगा। लोग किसी की जिंदगी बचाने के लिए यहां रक्तदान करके जाते हैं। लेकिन उसी रक्त को यदि बाजार में बेचा जा रहा है तो यह बड़े अपराध से कम नहीं है।

ये है ब्लड इश्यू होने की प्रक्रिया
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से यदि किसी प्राइवेट अस्पताल में दाखिल मरीज को ब्लड चाहिए हो तो अस्पताल द्वारा स्वास्थ्य विभाग का एक प्रोफॉर्मा भर कर डॉक्टर की स्वीकृति का पत्र लेकर ब्लड बैंक जाना होता है। जहां से 1050 रुपये की टेस्टिंग फीस लेकर ब्लड उपलब्ध होने पर यूनिट जारी कर दी जाती है। यदि मरीज सरकारी अस्पताल में ही है तो अस्पताल के डॉक्टर द्वारा रक्त की जरूरत लिखी हुई स्लिप पर बिना किसी फीस के रक्त दे दिया जाता है। निजी ब्लड बैंकों द्वारा टेस्ट फीस 1500 रुपये लेने के बाद बदले में एक यूनिट रक्त भी लिया जाता है। इसके बाद ब्लड मिलता है। इमरजेंसी में निजी प्राइवेट तौर पर 2000 से लेकर 5000 रुपये तक भी प्रति यूनिट वसूले जाते हैं।

दो तरह से पहुंचता है ब्लड बैंक में ब्लड
सरकारी ब्लड बैंक में दो तरह से ब्लड आता है। जिसमें एक तो रक्तदाता खुद अस्पताल पहुंच कर ब्लड देते हैं। वहीं दूसरा समय-समय पर आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों के माध्यम से रक्त दिया जाता है। इस समय भी जिला अस्पताल में ए बी पॉजीटिव व ए पॉजीटिव ग्रुप की भारी कमी बनी हुई है।

एक माह में औसतन 650 यूनिट उपलब्ध होता है रक्त
जिला अस्पताल में एक माह में ब्लड बैंक में करीब 650 से लेकर 700 यूनिट ब्लड उपलब्ध रहता है। जिसमें से 500 से लेकर 550 यूनिट लोगों को चढ़ा दिया जाता है।

रक्त के स्टॉक में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। जिसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि कोई गड़बड़ी भी थी या नहीं। गड़बड़ी मिली तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नहीं मिली तो भी ब्लड बैंक में काम में और पारदर्शिता लाई जाएगी।
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डा. मनीष बंसल, सिविल सर्जन, कैथल।
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