संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीसी अपराजिता ने दो सख्त निर्देश दिए कि आपदा कभी बताकर नहीं आती, इसलिए सभी विभागों को भूकंप जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए।
डीसी ने बैठक में सुरक्षा मानकों को लेकर कड़ा रुख अपनाया और जिला राजस्व अधिकारी व लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि जिले की सभी सरकारी इमारतों का तुरंत फायर सेफ्टी और स्ट्रेंथ (मजबूती) ऑडिट कराया जाए। विशेष रूप से लघु सचिवालय का सबसे पहले ऑडिट करवाया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में सरकारी भवन सुरक्षित रहें और राहत व बचाव कार्यों का प्रभावी संचालन किया जा सके।
डीसी ने सभी विभागों को अपने पास उपलब्ध मशीनरी, मैनपावर और उपकरणों की विस्तृत सूची तैयार रखने और सभी संसाधनों को चालू अवस्था में बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही आपदा के समय विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। जिला राजस्व अधिकारी को हर 15 दिन में सभी संबंधित अधिकारियों की अपडेटेड संपर्क सूची पुलिस के साथ साझा करने का भी निर्देश दिया गया।
बैठक में एसपी उपासना, एडीसी डॉ. सुशील कुमार, जिला परिषद के सीईओ सुरेश राविश, डीएमसी कपिल कुमार, सीटीएम गुरविंद्र सिंह, डीआरओ चंद्रमोहन और डीडीपीओ रितु लाठर मौजूद रहे।
आपदा प्रबंधन में विभागों की जिम्मेदारी
बैठक में यह तय किया गया कि आपदा के दौरान मुख्य रूप से पुलिस, फायर विभाग, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य विभाग, बिजली, संचार विभाग, परिवहन, खाद्य आपूर्ति, पब्लिक हेल्थ, पशुपालन, रेड क्रॉस आदि विभागों को लीड रोल में रहना होगा। एनडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कार्यप्रणाली को तीन चरणों में विभाजित किया गया है ः-
प्लानिंग, लॉजिस्टिक और ऑपरेशन।
n
प्लानिंग : संकट आने से पहले और दौरान की रणनीति जिले के आला अधिकारी तैयार करेंगे।
n
लॉजिस्टिक : राहत सामग्री और उपकरणों की समय पर उपलब्धता अधीनस्थ कर्मचारी सुनिश्चित करेंगे।
n ऑपरेशन: ग्राउंड जीरो पर राहत और बचाव कार्य का क्रियान्वयन।
इस प्रक्रिया के लिए सभी विभागों में आपसी तालमेल आवश्यक है।
जवाहर नवोदय विद्यालय में मॉक ड्रिल
आपदा प्रबंधन की तैयारियों के दृष्टिगत 22 जनवरी को जवाहर नवोदय विद्यालय तितरम में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसमें भूकंप के कारण किसी पुरानी बिल्डिंग के ढहने के काल्पनिक हालात में राहत एवं बचाव कार्यों का परीक्षण किया जाएगा। अलार्म बजते ही सभी संबंधित विभागों के संसाधन घटना स्थल पर पहुंचेंगे और राहत कार्य शुरू करेंगे। मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखना है।