जिला मुख्यालय पर सोमवार का दिन धरने-प्रदर्शन का रहा। कई संगठनों ने प्रदर्शन कर सरकार को जमकर कोसा। एएनएम व जीएनएम की छात्राओं ने जहां सरकार से अपनी परीक्षाएं करवाए जाने की मांग की। वहीं आंगनबाड़ी वर्कर्स ने सरकार की नीतियों के विरोध में पुतला जलाकर रोष प्रकट किया। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने हक मांगा तो नवनियुक्त जेबीटी टीचर्स ने प्रदर्शन कर सरकार से नौकरी देने की मांग की। पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर्स ने भी प्रदर्शन कर हक मांगा। सभी प्रदर्शनकारियों के एक ही समय में सचिवालय में जमा होने पर पुलिस ने प्रवेश द्वार बंद कर दिया। करीब घंटे भर तक कर्मचारी व अन्य प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय के बाहर नारेबाजी करते रहे।
एएनएम व जीएनएम ने की परीक्षाएं करवाए जाने की मांग, पिहोवा चौक पर लगाया जाम
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले एएनम-जीएनएम छात्राओं ने पहले करनाल रोड पर प्रदर्शन किया। इसके बाद पिहोवा चौक पर करीब एक घंटे तक जाम लगाया। इन छात्राओं ने दो साल से बंद पड़ी परीक्षाएं करवाए जाने एवं करनाल में लाठीचार्ज के दौरान दर्ज मामलों को वापस लिए जाने की मांग की। छात्राओं का नेतृत्व कर रही दीक्षा, तनप्रीत, मनप्रीत कौर, सुमन व एसएफआई के राज्य सहसचिव गौरव शर्मा, जिला प्रधान सुरजीत जिला सहसचिव विजय रोहेड़ा सहित अन्य ने लघु सचिवालय में पहुंच कर अधिकारियों को ज्ञापन दिया।
आंगनबाड़ी वर्कर्स ने केेद्रीय मंत्री की शव यात्रा निकाली
आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स यूनियन ने यूनियन प्रधान कांता हजवाना की अध्यक्षता में प्रदर्शन किया। यूनियन की महासचिव शकुंतला ने कहा कि अखिल भारतीय आंगनबाड़ी फेडरेशन के आह्वान पर पूरे देश के अंदर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की शवयात्रा निकली और पुतला दहन भी किया। पिछले दिनों मंत्री ने कहा था कि 10 साल के अनुभव वाली आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को पक्का कर्मचारी बनाया जाएगा। लेकिन दूसरी तरफ विभाग को निजीकरण की गर्त में धकेला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि 9 अगस्त को सीटू के आह्वान पर मुख्यमंत्री के गृह निवास करनाल में रैली की जाएगी। इस मौके पर कमल, शशि, रूचि, अनीता, अंजू, गुड्डी, शशि, रीना, सुदेश, सरोज, निशा व पूरे जिले से सैंकड़ों कार्यकर्ता शामिल रही।
लघु सचिवालय का मुख्य प्रवेश द्वार बंद किया, संगठनों में बढ़ा रोष
लघु सचिवालय में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक चल रही थी। वहीं प्रदर्शन करते हुए छात्राएं, आंगनबाड़ी वर्कर्स व अन्य संगठन भी लघु सचिवालय पहुंच गए और मुख्य संसदीय सचिव बख्शीश सिंह विर्क को ज्ञापन देने की मांग करने लगे। जिसके चलते पुलिस ने करनाल रोड पर ही सभी प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। एक साथ सड़क पर कई संगठनों के कार्यकर्ताओं के एकत्रित होने से जाम की स्थिति बन गई। जब प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाइवे पर जाम लगाने की चेतावनी दी तब जाकर प्रवेश द्वार खोला गया। यहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। इसके बाद भी उन्हें पार्किंग से पहले तक सचिवालय के अंदर नहीं जाने दिया गया। बेरिकेड लगाकर पुलिस ने पार्किंग स्थल से बाहर ही उन्हें रोक लिया। आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बाद में कोर्ट की ओर जाने वाली सड़क पर ही पुतला जलाकर रोष प्रकट किया।
किसानों ने की बिजली बिल माफ किए जाने की मांग
गत वर्ष ओलावृष्टि से खराब हुई गेहूं की फसल की एवज में एक साल के बिजली बिल माफ करने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों ने एसई कार्यालय के मुख्य द्वार को बंद करके धरना दिया। इससे पूर्व किसानों ने जवाहर पार्क में जिलाध्यक्ष राम सिंह खुराना की अध्यक्षता में किसान पंचायत का आयोजन किया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतन मान की अगुवाई में शहर की सडक़ों पर उतर कर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने बिजली निगम के एसई को किसान विरोधी करार देते हुए निगम कार्यालय का करीब 2 घंटे मुख्य द्वार को बंद करके विरोध जताया और एसई के तबादले की भी मांग की। पंचायत को रामफल कंडेला, सुखपाल मोठसरा, प्रेमचंद शाहपुर, सतपाल दिलोंवाली, श्याम सिंह मान ने भी संबोधित किया। एक्सईएन के 7 दिन में समस्या को हल किए जाने के आश्वासन पर किसान शांत हुए।
पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर्स ने किया प्रदर्शन
पीडब्ल्यूडी मेकेनिक वर्कर्स यूनियन ने कर्मचारी नेता ओमपाल के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पंजाब के समान वेतन देने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, श्रम कानूनों का पालन करने, महंगाई, भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की। इस अवसर पर पवन शर्मा, रघुबीर, जगदीश, राजेश, कृष्ण अरोड़ा, गुरमीत, सतबीर, राजबीर, ईश्वर, जगबीर, दर्शनलाल, बलवान भी मौजूद थे। कर्मचारियों ने डीसी कार्यालय में ज्ञापन भी दिया।