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मनुष्य के जीवन में भक्ति विराट लक्ष्य : साध्वी देवा

Mon, 06 Apr 2026 03:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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विचार व्यक्त करती साध्वी देवा भारती।
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कैथल। दिव्या ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आरकेएसडी कॉलेज प्रोफेसर कॉलोनी आश्रम में साध्वी देवा भारती ने अपने विचार देते हुए कहा जब लक्ष्य बड़ा होता है तो उतना ही बड़ा उत्साह लेकर चलना पड़ता है। नदी का लक्ष्य सागर है, इसलिए उसका उत्साह भी धारा प्रवाह बहता है और समुद्र सामान अगाध होता है।
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मनुष्य के जीवन में भी भक्ति एक विराट लक्ष्य है। जिससे एक भक्त का मन सदा ही सेवा उत्सह से भरा रहता है। भक्ति के जीवन में एक पल का भी विश्राम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि जैसे हनुमानजी के समक्ष भी प्रभु श्री रामजी के प्रति सेवा का विराट लक्ष्य था। इसलिए वो प्रभु की सेवा में हर पल तैयार रहते थे।
इसलिए उनका कहना था” राम काज कीन्हे बिनु मोहे नहीं विश्राम” अर्थात भगवान राम का कार्य किए बिना मुझे आराम नहीं। उनका यही सिद्धांत प्रत्येक शिष्य के लिए प्रेरणा है। जिसको लेकर कि वह आगे बढ़ता हुआ अपने विराट लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। अंत में साध्वी प्रीति भारती ने मधुर भजनों का गायन किया।
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