कलायत। गंगा दशहरा पर्व पर पवित्र कपिल तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ तो उमड़ी पर सरोवर के दूषित जल के कारण श्रद्धालुओं ने स्नान से परहेज किया। ज्यादातर ने आचमन से चलाया काम
गंगा दशहरा पर्व पर सुबह से कपिल तीर्थ पर श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। तीर्थ स्नान के लिए श्रद्धालु सरोवर पर पहुंचे पर तीर्थ में जमा भारी गंदगी, मरी मछलियां और बदबूदार पानी देख कर आस्था आहत की हुई।
देहात से आए परमेश्वरी, सूबे सिंह, सुनीता, रामकली आदी ने कहा कि कपिल तीर्थ की बहुत मान्यता है। हर उत्सव पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना व स्नान के लिए पहुंचते हैं। सरोवर का पानी दूषित दिखा। तीर्थ के जल में मरी हुई मछलियां व गंदगी से लोगों की आस्था आहत हुई। नरेश कुमार वर्मा, विशाल, सुरेंद्र, तन्नू भारती, अमित गुप्ता आदी ने नाराजगी जताई।
एकादशी के व्रत से कटते हैं पाप
पंडित रवि दत्त शास्त्री श्रद्धालुओं को निर्जला का एकादशी महत्व बताया। उन्होंने कहा कि इस दिन व्रत रखने वाला समस्त पापों से मुक्त होता ही है, साथ ही उसके लिए मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में इस व्रत को निर्जल रहकर मनाने का विधान किया है। हिन्दू घरों में प्रत्येक मास की एकादशी को उपवास रखने का नियम पहले से ही चला आ रहा है। जो लोग अन्य एकादशी तिथियों को व्रत नहीं कर सकते वो केवल इस एकादशी का व्रत करके फल भागी बन सकते हैं।ु जयेष्ठ शुक्ल एकादशी सर्वोत्तम फल देने वाली मानी जाती है।