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Kaithal News: श्रद्धालुओं ने अस्ताचल गामी सूर्य को दिया अर्घ्य

Fri, 08 Nov 2024 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। छठ महापर्व के तीसरे दिन वीरवार को पूर्वांचल समाज की महिलाओं ने अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। खरना के बाद वीरवार को भी महिलाओं ने व्रत रखा और बाबा शीतलपुरी डेरे के घाट पर शाम को सूर्यदेव की उपासना की। पूजा-अर्चना के बाद पांच बजकर 33 मिनट पर उन्होंने अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह रहा। व्रत करने वाली महिलाओं का कहना था कि छठ पर्व पर पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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बता दें कि शहर की पूर्वांचल जन विकास मंच सेवा समिति की ओर से नौवां छठ महापर्व मनाया जा रहा है। अब शुक्रवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ पर्व संपन्न हो जाएगा। लोग इस पर्व को भी उतनी ही आस्था के साथ मनाते हैं, जैसा कार्तिक माह में मनाया जाता है। बाबा शीतलपुरी के घाट पर छठ व्रतियों ने तालाब में आस्था के साथ डुबकी लगाई। इस घाट पर जिला के कई स्थानों से लोग पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचे थे।
घाट पर श्रद्धालुओं की रही भीड़
बाबा शीतलपुरी के घाट पर आस्था के महापर्व छठ पर्व पर श्रद्धालुओं ने अस्तगामी सूर्य देवता को अर्घ्य दिया, जिसमें आस्था का सैलाब उमड़ आया। इस दौरान जहां बच्चे व युवा पटाखे फोड़ने में काफी मशगूल रहे तो महिलाएं छठ माता के गीत गाती रही। वहीं, छठ व्रती ने घंटों पानी में खड़ा होकर सूर्य देवता का ध्यान करती रही।
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पूर्वांचल जन विकास मंच सेवा समिति के प्रधान जय किशन राय ने बताया कि मूलरूप सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र मास में और दूसरी बार कार्तिक मास में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख-समृद्धी तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है।
स्त्री व पुरुष समान रूप से मनाते यह पर्व

राय ने बताया कि छठ के इस महापर्व को स्त्री और पुरुष समान रूप से मनाते हैं। छठ व्रत के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं उनमें से एक कथा अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गये, तब श्री कृष्ण द्वारा बताए जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उनकी मनोकामना पूरी हुईं व पांडवों को राजपाट वापस मिला। लोक परंपरा अनुसार सूर्य देव और छठी मइया का संबंध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी।
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