कैथल। गणेश चतुर्थी की तैयारी जोरों पर शुरू हो चुकी हैं। बाजार में मिट्टी, पीओपी, आदि की मूर्तियां बाजारों में सजने लगी हैं। मूर्तिकारों ने गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार गणेश चतुर्थी 7 को है। गणेश महोत्सव 17 सितंबर तक मनाया जाएगा।
इस पर्व के उपलक्ष्य में लगभग 10 दिनों तक गणेश जी की पूजा कर उनकी प्रतिमा को विर्सजित किया जाएगा। शहर में भी गणेश चतुर्थी को लेकर तैयार जोरों से चल रही है। इस बार लगभग छोटे-बड़े 200 के करीब गणपति पंडाल लगाने जाने का अनुमान है।
इस दिन लोग अपने घरों व पंडाल में 10 दिनों के लिए गणेश की छोटी बड़ी प्रतिमाओं को स्थापित करते हैं। इसके बाद सुबह व शाम के समय पूजा-अर्चना करते है। प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर के पंडित मुनींद्र मिश्रा ने व दिनेश भारद्वाज ने बताया कि इस बार मंदिर में 12वां विशाल गणपति महोत्सव सात से 15 सितंबर तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा।
इस बार लगभग छह फीट की विशाल प्रतिमा लाई गई है और इसे सजाया जा रहा है। सात सितंबर को मंदिर में विशाल प्रतिमा की स्थापना की जाएगी व प्रतिमा पूजन के साथ ज्योति प्रचंड की जाएगी। पहले दिन मंदिर से 111 कलश लेकर महिलाएं नगर की परिक्रमा कर तय रूट के अनुसार वापस मंदिर लौटेगी।
सात से 14 सितंबर तक प्रतिदिन शाम चार बजे महिला कीर्तन व शाम साढ़े सात बजे आरती की जाएगी। 14 सितंबर को दो बजे विशाल भंडारा लगाया जाएगा व शाम भजन संध्या में लक्की
ड्रॉ निकाले जाएंगे, जिसमें चांदी के गणपति व पांच चांदी के सिक्के वितरित किए जाएंगे। 15 सितंबर को जिस भी नहर में पानी होगा उसी में गणेश मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा।
इसके अलावा शहर में गणपति उत्सव के लिए शहर में तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संगठनों सहित कॉलोनियों, मोहल्लों के बने युवा क्लब रूपरेखा बनाने में लगे हैं। कई संगठन व क्लब गणपति उत्सव के लिए आसपास के लोगों से चंदा एकत्रित रहे हैं। जिससे पंडालों में सुबह शाम की आरती के साथ प्रसाद वितरण, चौकी, झांकियां व जागरण जैसे आयोजन हो सके। कुछ ऐसे संगठन व क्लब हें जो पिछले कई वर्षों से गणपति पंडाल लगाकर उत्सव मना रहे संगठनों व क्लबों की ओर से सात से 17 सितंबर तक के कार्यक्रम का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। 17 सितंबर को पंडालों में पूजा अर्चना कर शहर में शोभायात्रा के साथ चंदाना नहर, काकौत नबर, मुदड़ी नहर व अन्य छोटी बड़ी नहरों में गणपति की मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा है। संवाद