संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। प्रदेश सरकार की ओर से शहरी विकास को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बावजूद कलायत नगर पालिका इन योजनाओं के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रही है। आम चुनावों के बाद नगर पालिका द्वारा आमंत्रित सात टेंडरों में करीब 88 लाख रुपये की राशि प्रस्तावित की गई है, लेकिन यह बजट समग्र विकास की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता नहींंं दिख रहा।
दरअसल, इन टेंडरों में से 41.91 लाख रुपये की राशि केवल 16 वार्डों में सीमित मरम्मत कार्यों पर खर्च की जानी है। इसका अर्थ है कि औसतन प्रत्येक वार्ड को महज 2.62 लाख रुपये का मरम्मत कार्य ही मिलेगा। वहीं, अकेले नगर पालिका कार्यालय परिसर में 11.28 लाख रुपये की लागत से टाइल ब्लॉक लगाने की योजना बनाई गई है।
वार्डवार असंतुलन ः नगरपालिका की योजना के अनुसार वार्ड 2 में केडी शर्मा के कृषि फार्म के सामने 8.63 लाख रुपये और वार्ड 8 में राजबीर एमसी से रामचंद्र की चक्की तक गली निर्माण पर 5.22 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, वार्ड 16 की नायक कॉलोनी में सात मुख्य एवं ब्रांच गलियों के निर्माण के लिए केवल 8.64 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित है।
अधर में लटकी रहबारी चौपाल, चौपाल विहीन जनता ः वार्ड 9 में वर्षों से अधर में लटके रहबारी चौपाल का कार्य शुरू करने के लिए इस बार 13 लाख रुपये से कम का टेंडर आमंत्रित किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बजट पर्याप्त नहीं है। चौपाल के अभाव में रहवासियों को सामाजिक आयोजनों सहित अन्य गतिविधियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधूरी परियोजनाएं बनीं प्रतीक्षा की मूरत ः नगर में कई विकास परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं। भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र, अग्रसेन पार्क और महाराणा प्रताप सामुदायिक केंद्र का निर्माण कार्य वर्षों से लंबित है। विधायक इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।
ठेकेदारों की अनदेखी, विभाग के नोटिस बेअसर ः शहर में कुछ विकास कार्य ऐसे भी हैं जिन्हें बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है। नगर पालिका द्वारा संबंधित एजेंसियों को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन ठेकेदार कार्य में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस उदासीनता के चलते आम जनता को बार-बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
मरम्मत पर फोकस, नहीं दिख रही समग्र योजना
आमंत्रित पहली टेंडर सूची में न तो किसी सौंदर्यीकरण योजना का जिक्र है और न ही विभिन्न वर्गों को ध्यान में रखते हुए कोई बड़ी परियोजना शामिल की गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” नीति जमीन पर दिखाई नहीं दे रही।मरम्मत पर फोकस, नहीं दिख रही समग्र योजना
आमंत्रित पहली टेंडर सूची में न तो किसी सौंदर्यीकरण योजना का जिक्र है और न ही विभिन्न वर्गों को ध्यान में रखते हुए कोई बड़ी परियोजना शामिल की गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” नीति जमीन पर दिखाई नहीं दे रही।
प्रक्रिया के तहत सात कार्यों के लिए करीब 88 लाख रुपये के टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर आगामी समय में और भी कार्यों के टेंडर जारी किए जाएंगे। विकास के मामलों में पूरे शहर का ध्यान रखा जाएगा और कार्य पारदर्शिता से पूरे किए जाएंगे। -पवन शर्मा, सचिव नगर पालिका