सिटी स्क्वॉयर के निर्माण को मिली संजीवनी
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पांच साल से लटके शहर के बीचों-बीच स्थित सिटी स्क्वॉयर के अधूरे पड़े काम के पूरा होने का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। नगर परिषद ने इसका ले आउट प्लान तैयार कर लिया है। इस पर करीब 30 करोड़ रुपये की लागत आएगी। डीसी की अनुमति लेकर बजट की प्रशासनिक अनुमति के लिए विभाग मुख्यालय भेज दिया गया है। जिसकी मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
साढ़े चार साल से लटका है मामला
शहर में बीचों-बीच स्थित पुराने बस अड्डे की 43 कनाल 10 मरले जमीन में कांग्रेस सरकार के समय से ही सिटी स्क्वॉयर का मामला अधर में लटका है। शहर के लोगों को मनोरम स्थल व बैंकिंग स्क्वॉयर बनाकर दिया जाना था। जिससे शहर में जाम की बड़ी समस्या से मुक्ति मिलनी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कैथल में आयोजित रैली में इसके काम को पूरा करने का भी एलान किया था। इसके बावजूद यह मामला अभी तक लटका हुआ था।
डीसी ने प्रोजैक्ट तैयार कर विभाग मुख्यालय भिजवाया
नगर परिषद ने अब इस प्रोजैक्ट का ले आउट प्लान तैयार कर लिया है। पूर्व में तैयार किए गए प्लान में कुछ तब्दीली की गई है। नक्शा पास करवाकर डीसी से अनुमति ली गई। डीसी ने इस मामले में काफी रुचि दिखाई और इसे स्वीकृत कर शहरी निकाय विभाग में प्रदेश मुख्यालय भिजवा दिया गया है।
30 करोड़ 87 लाख रुपये आएगी लागत
सिटी स्क्वॉयर में कुछ काम पहले हो चुका है। बाकी काम पर करीब 30 करोड़ 87 लाख रुपये की लागत आएगी। जिसमें बैंकिंग स्क्वॉयर के अलावा म्यूजिकल फाउंटेन, विशाल अशोक चक्र, लैंड स्केपिंग, वाटर बॉडी, पार्किंग सहित सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था ह