11-कैथल। गांव काकौत में बनी लाइब्रेरी का दृश्य।
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कैथल। पंचायत चुनाव को लेकर जिले के ग्रामीण अंचल में हर गली घर में राजनीतिक चर्चाएं जोरों पर हैं। गांव काकौत में पिछले पांच साल के कार्यकाल में करीब तीन करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए हैं। फिर भी गांव में कुछ विकास कार्य अधूरे रह गए हैं। वहीं गांव में सही तरीके के गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था का प्रबंध भी नहीं हो पाया है।
लगभग सात हजार के करीब आबादी वाले गांव में 4800 के लगभग मतदाता हैं। ग्रामीणों की मानें तो गांव में लगभग 70 प्रतिशत लोग सरकारी नौकरी व अपना व्यवसाय करते हैं। शेष आबादी कृषि व कृषि से जुड़े कार्यों पर आधारित है। इस बार यदि पंचायत चुनाव की बात करें तो गांव काकौत से इस बार तीन उम्मीदवार सरपंच पद की दौड़ में है। सभी उम्मीदवार शिक्षा, लाइब्रेरी, स्वास्थ्य, गली, चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे व स्ट्रीट लाइटें लगवाने की बात करने के मुद्दे को लेकर चुनावी मैदान में है।
ग्रामीण नरेश कुमार, हरपाल ङ्क्षसह, संदीप, जिले सिंह, दर्शन राम ने बताया कि पिछले पांच साल में गांव में काफी विकास कार्य हुए हैं लेकिन गांव में गंदे पानी की निकासी की समस्या अब भी मुख्य समस्या बनी हुई है। इस बार भावी सरपंच पद के उम्मीदवारों से उम्मीद है कि गांव में गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था होगी और गांव में बनाई गई लाइब्रेरी में आधुनिक सुविधाएं बढ़ाई जाए ताकि गांव के पढऩे वाले युवाओं को फायदा मिल सके। यह कड़ी मेहनत एवं सामूहिक प्रयास का नतीजा है कि गांव काकौत के युवाओं ने कोरोना काल में जब गांव से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा था, उस समय सामूहिक प्रयास से एक लाइब्रेरी बनाई और उसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।
इसका परिणाम है कि गांव के इस समय 70 प्रतिशत युवा सरकारी नौकरियों पर है। युवा मोहित ने बताया कि कोरोना काल में उन्होंने युवा साथियों के साथ मिलकर गांव की पंचायत के सहयोग से लाइब्रेरी बनाई। इसमें भवन व फर्नीचर पंचायत ने दिया। समाजसेवी और अन्य लोगों से करीब दो लाख रुपये जुटाए। कुछ ऐसे युवाओं ने भी पैसा दिया, जो लाइब्रेरी में पढ़ते भी हैं और कहीं काम भी करते हैं। सुबह पांच बजे लाइब्रेरी खोल दी जाती है। रात को पढ़कर जाने वाले युवा रात में ही इसकी सफाई करके जाते हैं। युवाओं की एक कमेटी बनाकर लाइब्रेरी का संचालन किया जाता है। ग्राम पंचायत के सहयोग से बनी इस लाइब्रेरी की सहायता से ही यह सफलता मिली है। गांव के लगभग 50 युवा यहां बैठकर पढ़ाई करते हैं।