संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। धुंध व कोहरे के बीच सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु भी हादसों का कारण बन रहे हैं। इनके कारण रोजाना किसी न किसी सड़क पर हादसे हो जाते हैं। कैथल और चीका में यह सबसे गंभीर समस्या है।
लोगों का कहना है कि समाधान न होने के कारण कई वाहन चालकों की जान जाती है और कई चोटिल हो जाते हैं। हालांकि सामाजिक संगठनों की ओर से कई बार अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को लाया जाता है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
गौरतलब है कि अकेले कैथल शहर में इस समय 500 से अधिक बेसहारा पशु सडक़ों पर हैं। विशेषकर माता गेट, डोगरा गेट, नई सब्जी मंडी, चंदाना गेट के पास का क्षेत्र, फ्रांसवाला रोड, प्रताप गेट, चीका रोड बाइपास, देवीगढ़ रोड व मॉडल टाउन में पशुओं की भरमार है। इसके अलावा अनाज मंडी क्षेत्र, जींद रोड व कुरुक्षेत्र रोड पर भी पशु बैठे रहते हैं। यही स्थिति चीका शहर में है। चीका के मुख्य ऊधम सिंह चौक, गुहला रोड, पिहोवा रोड व पटियाला रोड पर दर्जनों की संख्या में गायें व नंदी बैठे रहते हैं।
धुंध के दौरान काले रंग के पशु तो दिखाई ही नहीं देते, जिससे सडक़ दुर्घटनाएं और ज्यादा होती हैं। कई बार सडक़ों के एक साइड से पशु अचानक सड़क के बीचों-बीच आ जाते हैं, जिससे वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। दोपहिया वाहन चालकों को तो ऐसे हादसों में जान जाने का भी खतरा रहता है।
शहरवासी, नरेंद्र, संजीव, ओमप्रकाश, रामनारायण व संदीप ने बताया कि पहले भी कई बार इस समस्या के समाधान को लेकर मुद्दा उठता रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कुलदीप मलिक ने कहा कि पशुओं को पकडऩे के लिए नगर परिषद की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। इनको पकडक़र गोशालाओं में छोड़ा जा रहा है। टीमें लगातार इस कार्य में लगी हुई हैं। प्रयास है कि अधिक से अधिक पशुओं को पकड़ा जाए।