कैथल। अटेला गांव में बीते 24 अक्तूबर को प्रशासनिक अफसरों का रात्रि ठहराव कार्यक्रम हुआ था। ग्रामीणों में उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन 41 दिन बीत जाने के बाद भी हालात नहीं बदले। समस्याएं उसी स्थिति में खड़ी हैं, जैसे कार्यक्रम वाले दिन थीं।
ग्रामीणों का कहना है कि अफसरों के आश्वासन कागजों तक सीमित रहे।एक भी काम जमीन पर शुरू नहीं हुए। आश्चर्य यह है कि ठहराव के बाद कोई अधिकारी गांव में दोबारा झांकने तक नहीं आया, जबकि मौके पर तुरंत कार्रवाई के दावे बढ़-चढ़कर किए गए थे।
नाराज ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याएं बहुत बड़ी नहीं थीं। सड़क दुरुस्तीकरण, पेयजल की व्यवस्था, पानी निकासी, स्कूल के पास खड़े ट्रांसफॉर्मर को हटवाने जैसी मामूली समस्याओं पर भी काम शुरू नहीं हुआ। उनका कहना है कि अगर इतने छोटे कार्य भी पूरे नहीं हो सकते तो रात्रि ठहराव जैसे कार्यक्रम की औपचारिकता निभाने की जरूरत ही क्या थी। अटेला गांव जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दूर और लगभग एक हजार की आबादी वाला छोटा गांव है। सरकार छोटे गांवों में रात्रि ठहराव के जरिए त्वरित समाधान का दावा करती है, जो जमीनी स्तर पर असरहीन साबित हो रहा है।
बड़े अधिकारी मौजूद थे, फिर भी कोई काम नहीं शुरू ः रात्रि ठहराव में डीसी, एसपी, जिला परिषद सीईओ सुरेश राविश, एसडीएम अजय सिंह, डीएसपी सुशील प्रकाश, डिप्टी सीईओ सुमित चौधरी सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद थे। इसके बावजूद एक भी समस्या पर कार्य शुरू न होना प्रशासनिक निष्क्रियता को उजागर करता है। इससे सरकार की वह छवि भी प्रभावित हो रही है, जो इस कार्यक्रम के जरिए कम समय में समस्याओं का समाधान देने का दावा करती है।
ग्रामीणों ने ये रखी थीं प्रमुख समस्याएं
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लाडो लक्ष्मी योजना के तहत पंजीकरण
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कश्यप चौपाल का निर्माण
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सरकारी स्कूल के सामने वाली सड़क का दुरुस्तीकरण
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पेयजल व पानी निकासी
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बुढ़ापा पेंशन
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मुख्यमंत्री आवास योजना के 100-100 गज प्लॉट
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परिवार पहचान पत्र में आय कम करने
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स्कूल के पास लगे ट्रांसफॉर्मर को शिफ्ट करना
n अटेला से बाबा लदाना तक सड़क निर्माण
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कैथल-खरकां बस सेवा में बढ़ोतरी