कैथल। स्वास्थ्य विभाग कैथल की ओर से डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए चलाए गए अभियान के सार्थक परिणाम सामने आए हैं। विभाग के प्रयासों का असर है कि इस बार जिले में डेंगू का संभावित टेस्ट करवाने वाले लोगों की संख्या गत वर्ष से करीब 10 गुणा कम रही। टेस्ट करवाने के लिए अस्पताल में पहुंचे इन मरीजों में से भी ज्यादातर का डेंगू या मलेरिया पॉजिटिव नहीं मिला। अब स्वास्थ्य विभाग ने जिले को मलेरिया और डेंगू से मुक्त होने दावा करते हुए सर्टिफिकेशन के लिए नाम केंद्र को भेजा है। अगर कैथल को इस सर्टिफिकेट की स्वीकृति मिलती है तो जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को और ज्यादा मजबूती मिलेगी।
पिछले वर्ष विभाग द्वारा किए गए थे 2250 टेस्ट :
स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू और मलेरिया के सीजन में पिछले वर्ष 2250 लोगों को टेस्ट किए गए थे, जिनमें से कई मरीजों को पीड़ित पाया गया। इस बार मात्र 212 टेस्ट किए गए, जिनमें से तकरीबन सभी को टेस्ट के बाद सामान्य बुखार जैसी बीमारी ही पाई गई। इसलिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र में सर्टिफिकेशन के लिए कैथल का नाम भेजा है।
लारवा मिलने पर विभाग दे चुका 865 लोगों को नोटिस :
जीवाणु जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए अब भी विभाग की ओर से जिले में अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जहां लोगों को बीमारियों के फैलने के कारण और बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं, वहीं डेंगू या मलेरिया पैदा करने वाले मच्छरों को खत्म करने के लिए लारवा मिलने वाले स्थानों पर दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है। विभाग ने डेंगू का लारवा मिलने पर 865 लोगों को इस संबंध में नोटिस जारी किया है कि वे अपने आसपास सफाई का ध्यान रखें और लारवा को पनपने से रोकें। करीब दो हजार सक्षम युवाओं की टीम अब भी जिले में विभिन्न स्थानों पर बीमारियों की रोकथाम के लिए कार्य कर रही है।
अभियान जारी :-
सिविल सर्जन डॉक्टर सुरेंद्र नैन ने कहा कि सक्षम युवाओं के अलावा विभाग के कर्मचारियों को भी इन बीमारियों की रोकथाम के लिए लगाया गया है। जो जून माह से लेकर अब तक लगातार कार्य कर रहे हैं। अगर अस्पताल को डेंगू या मलेरिया से मुक्त होने का सर्टिफिकेट मिलता है तो इससे जिले का नाम तो रोशन होगा ही, साथ में अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को भी मजबूती मिलेगी।