संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बरटा गांव की पंचायती जमीन पर स्थापित बाबा साहेब डॉ. भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा हटाए जाने के मुद्दे पर सोमवार को गांव के दलित समाज के लोगों ने सचिवालय में प्रदर्शन किया और डीसी को मांगों का ज्ञापन दिया। इसमें आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीणों के साथ मिलकर सरपंच जबरदस्ती प्रतिमा हटाना चाहता है।
प्रदर्शन का नेतृत्व एडवोकेट रजत कंसल ने किया। ग्रामीण सुबह के समय जवाहर पार्क एकत्रित हुए और एक सभा की। सभा में बोलते हुए रजत ने कहा कि नौ फरवरी 2024 को सरकारी ग्रांट से गांव बरटा में सार्वजनिक भूमि पर बाबा साहब आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। जिसे मौजूदा सरपंच कुछ लोगों की सहायता से हटाना चाहता है।
आरोप लगाते हुए कहा कि सरपंच जब दीवार तोड़ने लगा तो दोनों पक्षों में विवाद हो गया। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ केस दर्ज किया था। दलित समाज के लोगों की शिकायत पर एससी एसटी एक्ट लगाया गया था। मामले की जांच डीएसपी को सौंपी गई थी और उन्हें 90 दिनों में रिपोर्ट देनी थी लेकिन डीएसपी ने 15 दिन में रिपोर्ट दे दी और दूसरे पक्ष से एससी एक्ट हटा दियाया।
दूसरे पक्ष की शिकायत पर दलित समाज के लोगों ही गिरफ्तार किया गया। सरपंच ने बीआर आंबेडकर सभा को प्रतिमा हटाने के लिए नोटिस दिया। इसके बाद एसडीएम ने भी प्रतिमा हटाने के आदेश जारी किए। इसके विरोध में भी हाईकोर्ट चले गए और हाई कोर्ट ने यथा स्थिति बनने के आदेश जारी किए हैं। बावजूद इसके सरपंच जबरदस्ती प्रतिमा हटाने के लिए प्रयासरत हैं।
दूसरी ओर दलित समाज के लोग किसी भी कीमत पर गांव से यह प्रतिमा हटाने नहीं देंगे। आरोप लगाया कि इस मामले में सरकार ने प्रशासन पर पूरा दबाव बनाया है और कहा है कि कोई कार्रवाई न करें। वे अपनी मांगों को लेकर एसपी व डीसी से मिलने के लिए हैं। यदि हमारी प्रशासन बात सुनता है तो ठीक है, नहीं तो सभी लोग गांव से आकर वहां पर प्रदर्शन करेंगे।
भीम आर्मी कैथल जिला के प्रधान राजेश ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया। कहा कि गांव बालू में भी दलितों के साथ नाइंसाफी की गई और उनके गांव का भी यही मामला है। पंचायत के जितने भी नुमाइंदे हैं और सरकार के जितने भी लोग बैठे हैं। वह सब दलितों के खिलाफ हैं। प्रदर्शन के दौरान एसपी उपासना व एडीसी जय श्रद्धा मौके पर पहुंची और उनका ज्ञापन लिया। दोनों अधिकारियों ने उनकी बात सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद वह वापस गांव लौट गए।