संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। खेड़ी रायवाली गांव में आशियाने बचाने के लिए रविवार को महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें आसपास के गांवों के मौजिज लोगों व सरपंचों ने हिस्सा लिया। महापंचायत में प्रकरण के मुख्य सूत्रधार पूर्व सरपंच बचना राम ने कहा कि गांव में किसी भी परिवार को मकान गिराए जाने में उनका कोई हाथ नहीं है, लेकिन वाल्मीकि समाज के साथ वे मरते दम तक अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि गांव में वाल्मीकि की चौपाल न बनाया जाना मुख्य मुद्दा है।
बचना राम ने कहा कि काफी समय पहले गांव के कुछ दबंगों ने वाल्मीकि समाज पर अत्याचार किए। जिस कारण समाज के लोग गांव त्याग कर अन्य स्थानों पर बस गए थे, लेकिन एक वर्ष बाद हे उन्हें फिर वापस गांव में लेकर आए थे। उस समय वाल्मीकि समाज ने उनसे जीवन भर सम्मान के साथ गांव में रहने का वचन लिया था। वे हर हालत में चौपाल बना कर रहेंगे। बचना राम ने आश्वासन दिया है कि सात मौजिज लोगों को अधिकार दिया गया है। इसमें सरपंच सतपाल साकरा,जसबीर बेगपुर, श्रवण कुमार सोलूमाजरा,रणदीप आर्य फरल,जसबीर गुर्जर बेगपुर शामिल हैं।
बचना राम ने कहा कि ये लोग दूसरे पक्ष के साथ मिलकर गांव हित में जो भी सामूहिक फैसला लेंगे, उन्हें यह मंजूर होगा। बचना राम की तरफ से सात सदस्यों की बनाई गई कमेटी दूसरे पक्ष के साथ शीघ्र ही बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने का काम करेगी। बचना राम ने कहा कि इस मामले में पड़ोसी गांव का एक युवा नेता राजनीतिक खेल खेल रहा है। वह दूसरे समाज के लोगों को बेवजह भड़का रहा है।
गांव के लोगों को गांव में भाईचारा कायम रखने के लिए आपस में मिल बैठ कर सहमति से बीच का रास्ता निकालना चाहिए। बचना राम ने कहा कि उसने हमेशा गांव के हित की लड़ाई है। उन्होंने 30 जून 1986 को माननीय अदालत से पारित आदेशों की प्रतियां भी दिखाईं।बचना राम ने कहा कि उस समय अदालत ने फैसला सुनाया था कि जहां भी अवैध कब्जे वाले स्थानों पर मकान बने हुए हैं उनकी एसडीएम से कलेक्टर रेट निर्धारित करवाकर पैसा जमा करवाया जाए। लेकिन ऐसा आज तक नही हुआ है।