संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। सीवन नगरपालिका का दर्जा भंग कराने की मांग पर रविवार को रामा आश्रम में कस्बा के लोगों की एक बैठक हुई। इसमें सीवन में नगर पालिका भंग करने की मांग करते हुए तमाम लोगों ने विरोध का नारा बुलंद किया। रामा आश्रम में कस्बा के लोगों ने सीवन को फिर से पंचायत बनाने की मांग के संदर्भ में विचार-विमर्श किया।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में सीवन को नगर पालिका का दर्ज मिला था लेकिन बाद में लोगों ने विरोध चालू कर दिया। बैठक की अध्यक्षता अमरेंद्र्र खारा ने की। कृष्ण कुमार आनंद, यशपाल राणा, अमृत लाल, सुरेंद्र नागपाल, सुरेश वधवा व अन्य ने अपने विचार रखे। कहा कि सीवन नगरपालिका को भंग करवाने के लिए एक बार फिर से सभी ग्राम वासियों को लामबंद होना होगा।
नाराज लोगों का आरोप है कि नगरपालिका के आने के बाद से नगर में विकास कार्य बंद हो गए हैं और सभी ग्रामीणों को नुकसान ही हुआ है। पहले तो सफाई हो जाती थी परंतु जब से नगरपालिका आई है उसके बाद से सफाई व्यवस्था भी ठप है।
बैठक में आरोप लगाते हुए कहा गया कि नगरपालिका ढिंढोरा पीट रही है कि सफाई व्यवस्था दुरुस्त हुई है। मजदूरों को बेरोजगार किया गया। बेरोजगार युवाओं से उनका ग्रामीण क्षेत्र का हक छीन लिया गया। लोगों को अपने ही घर में किरायेदार बना दिया गया और उनसे उनके मालिकाना घर व दुकानों का किराया टैक्स के नाम पर वसूलने का काम नगरपालिका ने किया है।
लोगों ने कहा कि बैठक का उद्देश्य आगामी रणनीति बना कर नगरपालिका को समाप्त करना है और यह तभी संभव है जब सभी ग्रामवासी एक साथ एकजुट होंगे। इस अवसर पर रमेश जेई, नारायण, सुरेश सैनी, रामेश्वर तंवर, राजपाल तंवर, बलराज, सतपाल सैनी, पाला राम सैनी, दर्शन रहेजा, पिरथी सैनी, पाला राम सौदा, काला राम, साहिल वर्मा व भारी संख्या में में नगर निवासी मौजूद रहे।
अमरेंद्र खारा व यशपाल राणा ने बताया कि रविवार की बैठक जो रामा आश्रम में होनी थी उसी समय पर एक अन्य पार्टी की बैठक भी वहां पर होनी तय हुई थी। जानकारी के अभाव में दोनों बैठकों का समय एक ही रखा गया। अब सीवन नगरपालिका को भंग करवाने के लिए बैठक का आयोजन 19 जुलाई को रामा आश्रम में बुलाई गई है। इस दिन आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। यदि आवश्यकता हुई तो एक बार फिर से धरना भी आरंभ किया जाएगा।
स्थानीय लोगों के विरोध का यह है कारण
नाराज ग्रामीणों का कहना है कि नगर पालिका बनने से हाउस टैक्स, सीवरेज टैक्स लगने लगा है। यदि कोई व्यक्ति मकान बनाना चाहता है, तो उसे पहले इसका नक्शा पास करवाना पड़ता है। नाराज ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पहले गांव के बच्चों को ग्रामीण क्षेत्र में होने की वजह से प्रवेश और नौकरियों में 5% का फायदा मिलता था लेकिन अब वह भी बंद हो गया है। गांव के ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं पर अब गांव के दिहाड़ी मजदूर और मनरेगा मजदूर नगरपालिका बनने की वजह से बेरोजगार हो गए हैं।