कैथल। ऑल इंडिया आंबेडकर महासभा ने प्रदेश सरकार पर एक दलित आईएएस अधिकारी की विधवा महिला के साथ धोखाधड़ी कर करोड़ों दलितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि सरकार ने मामले को दबाने के लिए सिर्फ दिखावे के तौर पर एफआईआर दर्ज करवाई है।
महासभा का आरोप है कि दर्ज एफआईआर में आरोपियों के नाम वाले कॉलम को रिक्त छोड़ा गया और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2) को भी नहीं जोड़ा गया। जबकि यह आईएएस अमनीत पी. कुमार की प्रमुख मांगों में से एक थी। अब तक इस अधिनियम के तहत कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
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ऑल इंडिया आंबेडकर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश बहादुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर नामजद अधिकारियों के खिलाफ भले ही एफआईआर दर्ज हुई हो, लेकिन कानून में दिए गए सख्त प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी की गई है। महासभा ने हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया की गिरफ्तारी की मांग की है। कहा कि यदि कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर बड़े आंदोलन का रूप लेगा।
भाजपा सरकार जानबूझकर दलित विरोधी मानसिकता के साथ काम कर रही है। आरोपी अधिकारियों को बचाने की कोशिश, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा पर सीधा हमला है। -राकेश बहादुर, राष्ट्रीय अध्यक्ष- ऑल इंडिया आंबेडकर महासभा