कैथल। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब दोपहिया वाहन बाजार में भी दिखाई देने लगा है। पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
ऐसे में अब लोग पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की बजाय ई-स्कूटर की ओर रुख कर रहे हैं। ई-वाहन विक्रेताओं का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या बढ़ी है और रोजाना 30 लोग ई-स्कूटर की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं।
जिले भर में ई-स्कूटी की 20 दुकानें हैं। अधिकतर दुकानें छोटू राम चौक और अंबाला रोड पर हैं। मोदी की अपील का भी असर देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने ईंधन बचाने की बात कही है। इसे देखते हुए लोग ई-स्कूटी का रुख कर रहे हैं। हर दिन पांच से सात वाहन बिक रहे हैं जो प्रधानमंत्री की अपील के पहले तक 2 से तीन स्कूटियां भी मुश्किल से बिकती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से समय-समय पर ईंधन बचाने और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की अपील के बाद भी लोगों में वैकल्पिक ऊर्जा साधनों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब लोग पेट्रोल खर्च कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। ई-स्कूटर लिथियम-आयन बैटरी से संचालित होते हैं, जो सामान्य बैटरियों की तुलना में अधिक टिकाऊ और बेहतर प्रदर्शन देने वाली मानी जाती है। एक बार फुल चार्ज होने पर कई मॉडल 70 किलोमीटर की एवरेज देती हैं। वहीं बैटरी की आयु औसतन 3 से 4 साल तक मानी जाती है। यह बैटरी लीथियम से निर्मित होती है।
बाजार में ई-स्कूटर की शुरुआती कीमत करीब 40 हजार रुपये से शुरू होकर प्रीमियम मॉडल में 85 हजार रुपये के करीब पहुंच रही है। वाहन डीलरों के अनुसार ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार मॉडल पसंद कर रहे हैं। शहर निवासी रामेश्वर ने बताया कि पेट्रोल के बढ़ते खर्च से महीने का बजट बिगड़ रहा था। अब ई-स्कूटर खरीदने का विचार कर रहे हैं क्योंकि इसमें चलाने का खर्च बहुत कम है। प्रताप ने कहा कि ई-स्कूटर पर्यावरण के लिए भी बेहतर हैं। इनमें धुआं नहीं निकलता और शोर भी कम होता है। आने वाले समय में इनका उपयोग और बढ़ेगा।
ई-वाहन विक्रेता ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में शोरूम पर ई-स्कूटर की जानकारी लेने वालों की संख्या बढ़ी है। लोग सबसे पहले रेंज, बैटरी बैकअप और चार्जिंग खर्च के बारे में पूछ रहे हैं। पेट्रोल की तुलना में चलाने का खर्च काफी कम है। ई-स्कूटर से धुआं नहीं निकलता जिससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंच सकता है। संवाद