इसी कारण उसने आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ मोहाली में दाखिला लिया। यहां लॉ के अंतिम वर्ष में उसने जज बनने के बारे में सोचा। इसके लिए अंतिम वर्ष में ही तैयारी शुरू कर दी। सफलता पर उनकी दादी की आंखें भर आईं। वह बोलीं- आज मेरी बेटी की मेहनत सफल हुई है। तैयारी के समय वह दिल्ली में दीपिका के साथ करीब छह माह तक रही थीं।
बीच में जब कोविड आ गया तो वह घर आ गई थी। यहां माता-पिता सीमा रानी व वीरेंद्र सांगवान सहित उनकी दादी विद्या देवी ने खूब प्रेरित किया। उसने पहले हरियाणा व गुजरात में न्यायाधीश के लिए परीक्षा दी। साक्षात्कार तक सफलता हासिल की, लेकिन किन्हीं कारणों से चयन नहीं हो पाया। दीपिका ने कहा कि यदि आपके माता-पिता सपोर्टिव पैरेट्स (सहयोगी माता-पिता), पॉजिटिव फ्रेंड्स (ऊर्जायुक्त मित्र) और सेल्फ कॉन्फिडेंस (आत्मविश्वास) हो तो सफलता जरूर मिलती है। इसके बाद दिल्ली के लिए प्रयास किया। इसमें अब सफलता हासिल की है। इसके लिए कड़ी मेहनत व लगन ही मुख्य कारण है।
दीपिका के पिता वीरेंद्र सांगवान ने बताया कि वे पहले ढांड में रहते थे। बच्चों की अच्छी पढ़ाई के लिए वे कैथल में रहते हैं। बेशक यहां किराये के मकान में रहना पड़ा हो, बच्चों के लिए एजूकेशन लोन तक लेना पड़ा हो, वे पीछे नहीं हटे। बेटी ने बचपन से ही जज बनने का फैसला लिया था तो उसके हर फैसले में उसके साथ खड़े रहे। इस कारण आज नतीजा सामने है।
परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े
अन्य अभिभावकों के लिए संदेश में वीरेंद्र सांगवान ने कहा कि बच्चे पर विश्वास रखें। वो जो करना चाहें, उनको प्रोत्साहित करें। बेटियां भी आज कम नहीं हैं। बस जरूरत है, उनके साथ खड़ा होने की। दादी विद्या देवी ने कहा कि आज उसकी खुशी का ठिकाना नहीं हैं। दीपिका की मां सीमा देवी ने कहा कि बेटी हमेशा से कुछ करना चाहती थी। जो आज कर दिखाया। बात करते हुए परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
युवाओं के लिए संदेश
दीपिका ने अन्य युवाओं के लिए संदेश में कहा कि जरूरी नहीं है कि शुरू से ही उद्देश्य बन जाए। बाद में भी बन जाता है, लेकिन जब कुछ बनने की ठान लें तो उसमें सफलता के लिए सौ प्रतिशत मेहनत करें। तभी आपको सफलता मिल जाएगी।