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पहले चलाता था बंदूक, अब दे रहा उपदेश

Thu, 17 Apr 2014 12:47 AM IST
कैथल
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वर्ष 1958 से 1972 तक चंबल घाटी में आतंक का पर्याय रहे डाकू पंचम सिंह 25 जिलों में हुकूमत चलाते थे। आज वह राजयोगी ब्रह्म कुमार बन कर लोगों को आध्यात्म, गीता व योग की शिक्षा दे रहा है।
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कलायत के ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय प्रजापिता विश्वविद्यालय में पहुंचे 92 वर्षीय पंचम भाई ने लोगों को गीता का ज्ञान व योग की जानकारी दी तथा अपने अनुभव ‘अमर उजाला’ से सांझे किए।

चौथी तक पढ़े और ऐसे बने डाकू
पंचम भाई ने बताया कि मनुष्य के हर कर्म के लिए परिस्थितियां ही जिम्मेवार होती हैं। उनका जन्म 14 अप्रैल को 1924 को भिंड मध्यप्रदेश के गांव सीमपुरा में हुआ था। उन्होंने केवल चौथी कक्षा तक ही शिक्षा ग्रहण की। जब वे युवा हुए तो उनके कुछ सपने थे। जिन्हें वे हर हाल में पूरा करना चाहते थे। पर उस समय उनके साथ परिस्थिति ऐसी बनी कि उन्हें बंदूक उठानी पड़ गई। उनके परिवार को भी सबल लोगों ने बहुत परेशान किया। जिसका प्रतिकार लेने के लिए वे डाकू बन गए तथा कुछ ही समय में अपनी एक बड़ी फौज तैयार कर ली।
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उन्होंने अपने जीवन के 14 वर्षों में जो किया उसे याद करके भी आज भी उनके शरीर में सनसनी दौड़ जाती है। उन्होंने बताया कि उन पर 100 कत्ल, 200 अगवा, अपहरण व डकैती के मामले दर्ज थे।  तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने उनके ग्रुप को पकड़ने के लिए अनेक आपरेशन चलाए, फोर्स बुलाई तथा हजारों जवान हमें पकड़ने के लिए दिन रात एक किए रहते थे। उसके बावजूद भी उनके गुट का आतंक बढ़ता ही गया। आगरा जैसे शहर भी उनका नाम सुनते ही बंद हो जाते थे।

ब्रह्मा बाबा ने दिखाया सद्मार्ग
पंचम भाई ने बताया कि सभी डाकू मां दुर्गा की साधना करते थे तथा प्रतिदिन कई किलो देसी घी से मां का हवन करते थे। एक बार उन्होंने मां के दर्शनों का संकल्प लिया कि मां के दर्शन के बाद ही वे अन्न जल ग्रहण करेंगे। कई दिनों तक मां की अखंड साधना के बाद भी मायूसी ही हाथ लगी तो गुस्से में आकर उन्होंने मां की साधना न करने की प्रतिज्ञा की तथा बंदूक उठा कर नरसंहार के लिए चल दिए।

दोपहर करीब 12 बजे उन्हें एक दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए तथा उन्हें नरसंहार किए जाने से रोकते हुए कहा कि तुम्हारे जीवन में अब बदलाव का समय आ गया है तथा कुछ समय बाद तुम्हें चैतन्य देवियों का सानिध्य मिलेगा, जो तुम्हें भगवान से मिलाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी। इसके बाद वे प्रवचन करने लग गए।
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