संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। मोटर पंपों के नाम पर कुछ कंपनियों द्वारा कीमत वसूलने और खेतों के नलकूप कनेक्शन पर मीटर लगाने के विरोध में गांव शिमला में किसानों की महापंचायत जिले सिंह की अध्यक्षता में हुई। महापंचायत में किसानों ने गांव शिमला में किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के प्रवेश पर रोक लगाने का ऐलान किया।
किसान नेता जिले सिंह मोर ने कहा कि कि खेतों में नलकूप कनेक्शन के नाम पर किसानों पर नियम थोपे जा रहे हैं, जिस मोटर पंप की कीमत बाजार में 20 हजार रुपये है उसकी कीमत 54 हजार रुपये वसूली जा रही है। इस तरह विभिन्न हॉर्स पावर की मोटर के नाम पर किसानों के साथ सरेआम लूट की जा रही है। उन्होंने कहा कि खेतों के बिजली मीटर का बिल शुरू से ही निर्धारित रहा है, लेकिन अब सरकार कृषि कनेक्शन पर अलग से मीटर लगाने जा रही है। कुछ गांवों में इसकी शुरूआत हो चुकी है जिसे किसान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।
उनका कहना है कि सरकार ने नलकूप कनेक्शन के लिए केवल कुछ कंपनियों की ही मोटर निर्धारित की हैं। साथ ही कंपनियों के अलावा मोटर लगाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह किसान के साथ धोखा है। कृष्ण शिमला, आशीष मोर, महावीर व रतिराम का कहना है कि लॉकडाउन के नाम पर सरकार दोहरे मानदंड अपना रही है। आम आदमी पर लॉकडाउन के नाम पर जुर्माने लगाए जा रहे हैं जबकि भाजपा के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा किया जा रहा है। पंचायत में सरकारी अमले को हिदायत दी गई है कि यदि जबरन कोई कर्मचारी गांव में प्रवेश करता है तो उसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा।