संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। धान की कम पैदावार व मंडियों में उचित दाम ना मिलने से किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता हैं। एशिया की प्रमुख अनाज मंडी चीका में 22 सितंबर तक पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत कम धान आया है। धान की पैदावार का कम होना किसान और आढ़ती दोनों की चिंता बढ़ा रहा है।
पैदावार कम होने के साथ साथ इस बार बारीक धान पिछले वर्ष की तुलना में 600 से लेकर 800 रुपये प्रति क्विंटल तक कम बिक रहा है जिससे किसानों को दोहरी मार पड़ रही है।
किसान जरनैल सिंह जैली, केवल सिंह सदरेहड़ी, कप्तान सिंह शेरगिल रीवाड़ जागीर, शादी राम भागल आदि ने कहा कि धान की रोपाई के समय बरसात ना होने के चलते पौधों में पर्याप्त फूट नहीं हो सकी। इससे एक एकड़ में पांच से सात क्विंटल तक धान कम होने की आशंका है।
किसान नेताओं ने कहा कि एक तो पैदावार कम दूसरे दाम पर्याप्त नहीं मिलने से किसानों को 15 से 20 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे कर्ज का बोझ बढ़ेगा।
मंडियों में पहुंचा है 15 प्रतिशत तक कम धान ः चीका की मंडियों में पिछले वर्ष 22 सितंबर तक 78925 क्विंटल धान की आवक हुई थी लेकिन इस वर्ष मात्र 69485 क्विंटल धान ही मंडियों में पहुंचा है। लगभग 15 प्रतिशत कम धान की आवक होना किसान व व्यापारी दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
सरकार की पॉलिसी गलत ः मटोरिया
चीका राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान महावीर मटोरिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल का कोई खरीदार नहीं है। चावल एक्सपोर्ट को लेकर सरकार की गलत नीतियों के चलते मिलर पहले ही करोड़ों रुपये के कर्ज में डूबे हुए हैं। इसी नुकसान के चलते मिलर चालू सीजन में धान खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
मटोरिया ने कहा कि पहले तो सरकार ने चावल का एक्सपोर्ट बंद कर दिया जिससे मिलरों के पास चावल का स्टाक जमा हो गया अब एक्सपोर्ट खुलने के बाद व्यापारी चावल बेचने से डर रहा है।
धान की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी। सभी सरकारी एजेंसियां एक साथ मंडी में उतर धान की खरीद करेंगी। धान खरीद के सभी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। सरकारी खरीद पर खरा उतरने वाली धान का एक एक दाना खरीदा जाएगा। सतबीर राविश, मार्केट कमेटी सचिव, चीका।