संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। विदेश में बंदराणा निवासी विशाल की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के लिए नाराज ग्रामीणों ने शनिवार को प्रदर्शन किया। पंचमुखी चौक ढांड पर उन्होंने ट्रैक्टर-ट्राली खड़ी कर शव को सड़क के बीच रखकर जाम लगा दिया। इस कारण चौक के पांचों दिशाओं में वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई।
महिलाएं सडक़ पर बैठकर विलाप करने लगी। जाम की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार ढांड अचिन, डीएसपी बीरभान, थाना प्रभारी पूंडरी राम निवास शर्मा मौके पर पहुंचे और जाम लगा रहे ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करने लगे, लेकिन ग्रामीणों अपनी मांग पर अड़े रहे और कहा कि जब तक विशाल के हत्यारों की गिरफ्तारी और मामला निसिंग थाने से कैथल सीआईए में ट्रांसफर नहीं होता तब तक शव को लेकर यही धरने पर बैठे रहेंगे।
धरने पर बैठे नाराज ग्रामीण व परिजन विशाल के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग करते रहे। कड़कड़ाती धूप व गर्मी में परिजन व ग्रामीण हमें न्याय दो के नारे लगाते रहे। पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बन सुनता रहा।
डीएसपी ने ग्रामीणों को कहा कि आप शव का संस्कार दो हम आपके साथ है, आपको हर हाल में न्याय दिलवाएंगे, लेकिन ग्रामीण अपनी एक बात पर अडिग रहे कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती हम धरने पर बैठे रहेंगे और शव का संस्कार नहीं करेंगे।
करीब दो घंटे के बाद डीएसपी ने ग्रामीणों को कहा कि हमें 24 घंटे का समय दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लेंगे और मामला कैथल सीआईए में ट्रांसफर करवा लेंगे। इसके बाद ग्रामीणों की बनाई गई कमेटी ने विचार विमर्श करने के बाद निर्णय लिया कि वे डीएसपी की बात से सहमत है और शव का संस्कार भी करने को तैयार को तैयार हैं, लेकिन अगर 24 घंटे तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और एफआईआर निसिंग थाने से कैथल सीआईए में ट्रांसफर नहीं हुई तो इसके बाद फिर यही पंचमुखी चौक पर धरने पर बैठ जाएंगे। आश्वासन पर करीब दो घंटे बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। बाद में विशाल का अंतिम संस्कार गांव में कर दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोट के आधार पर जो भी कार्रवाई बनती होगी अवश्य करेंगे।
मामला निसिंग थाने में है उसे कैथल लाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा। पीडि़तों को हर हाल में न्याय मिलेगा।
-बीरभान, डीएसपी
ये है मामला
विशाल गरीब परिवार में पैदा हुआ। माता पिता मजदूरी करके परिवार का गुजारा कर रहे थे। घर की गरीबी को दूर करने के लिए विशाल आर्मेनिया चला गया। इसके बाद औंगद निवासी एजेंट अंकित ने साढ़े सात लाख में उसे जर्मनी भेजने के लिए कहा। परिजनों ने जैसे तैसे करके साढ़े सात लाख रुपये औंगद जाकर उसके परिजनों को सौंप दिए। इसके बाद आरोपी अंकित ने उसे बेलारूस में बुला लिया। जहां विशाल की अपने परिजनों के साथ छह अगस्त को बात हुई तो पता चला कि उसकी टांग पर गहरी चोट है।
सात अगस्त को फिर उसकी बात परिजनों से होती है और परिजन चोट से भयभीत होकर उसे वापस घर बुलाने की कहते है। परिजनों के साथ सात अगस्त को हुई वार्तालाप आखिरी थी। इसके बाद से उनका संपर्क नही हो सका। परिजन चिंतित होकर औंगद निवासी एजेंट से बात करते रहे कि हमारे बेटे से बात करवा दो। वह हमें आश्वासन देता रहा कि सब ठीक है, चिंता न करें। परिजनों की चिंताएं बढ़ती गई और आखिर वही हुआ जिसका उन्हें डर था और 22 अगस्त को पुलिस द्वारा उन्हें सूचना दी जाती है कि विशाल की बेलारूस में मौत हो गई है।