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एंबुलेंस की बजाय ट्रैक्टर-टाली में किसान अमरपाल के शव को लेकर गए किसान

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dead bodies - फोटो : Kaithal
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दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर किसान अमरपाल(32) की मौत से किसानों में रोष और गहरा गया है। किसानों ने सरकार के प्रति रोष जताकर जिला अस्पताल से शव को एंबुलेंस की बजाए ट्रैक्टर-ट्राली में ले जाने को प्राथमिकता दी। जय-जवान जय किसान के कफन को ओढ़ाकर अमरपाल का पार्थिव शरीर लेकर किसान गांव पहुंचे। ट्रैक्टर के पीछे सैकड़ों गाड़ियों का काफिला था। गांव में पहुंच कर हजारों किसानों ने अमरपाल को अंतिम नमन कर विदाई दी।
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सुबह भारी संख्या में ग्रामीण और किसान संगठनों से जुड़े लोग जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचना शुरू हो गए थे। सैकड़ों की संख्या में अस्पताल पहुंचे ग्रामीणों और किसानों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को गांव तक एंबुलेंस में ले जाने से मना कर दिया। किसान चार ट्रैक्टर-ट्रालियों और दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ ट्रैक्टर-ट्राली में शव को लेकर अस्पताल से रवाना हुए। शव पर जय जवान जय किसान लिखा कफन रखा गया। मौके पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान होशियार गिल प्योदा, मृतक के चचेरे भाई बलजीत, ग्रामीण सुरेंद्र, नरेश, बलविंद्र सिंह व अन्य किसानों ने बताया कि अमरपाल वीरवार को अपने गांव के किसानों के साथ सेवा सामग्री लेकर दिल्ली में किसान आंदोलन में गया था। शुक्रवार दोपहर एक बजे के करीब उसकी अचानक तबीयत बिगड़ गई ओर उसकी मौत हो गई। किसान इसे शुक्रवार रात को ही कैथल के सरकारी अस्पताल में ले आए थे। किसानों ने अमरपाल को शहीद का दर्जा देने की मांग की।
खाना खाते समय आया अटैक- दिल्ली से आए ग्रामीणों व किसानों ने बताया कि अमरपाल और कुछ अन्य किसान अपनी ट्राली में टिकरी बॉर्डर पर स्टेज की तरफ जा रहे थे। रास्ते में एक भंडारा चल रहा था। वहां से चावल लेकर खाने लगे। जैसे ही अमरपाल चावल खाने लगा तो अटैक का झटका आने से जीभ दांतों के नीचे आ गई और शरीर कांपने लगा। अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में वह बेहोश हो गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे जांच के बाद मृत करार दे दिया।
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पिता की पहले हो चुकी मृत्यु - अस्पताल पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि अमरपाल बड़े बेटा था। इसके माता-पिता की मृत्यु पहले हो चुकी है। इसका छोटा भाई 25 वर्षीय मोनू भी शादीशुदा है। दोनों भाई अपनी 10 एकड़ जमीन पर खेती करके परिवार चलाते थे। अमरपाल अपने पीछे 28 वर्षीय पत्नी कुसुम, एक आठ वर्षीय लड़का अंशु व पांच वर्षीय लड़की अंशिका को छोड़ गया। परिवार की जिम्मेदारी अमरपाल पर थी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला किसान आंदोलन में शहीद हुए 32 वर्षीय किसान अमरपाल ढुल के पैतृक गांव सेरधा में पहुंचकर शोक प्रकट किया और परिवार को इस मुश्किल घड़ी में ढांढस बंधाया। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि किसान विरोधी 3 काले कानूनों के विरोध में 45 किसान अपनी जिंदगी कुर्बान कर चुके हैं। लेकिन मोदी व मनोहर लाल सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। उन्होंने कहा कि कितनी और जिंदगी लेंगे सीएम और मोदी सरकार। सुरजेवाला ने कहा कि 32 दिन से हाड़ पिघलाती और रूह कंपकंपाती सर्दी में देश का अन्नदाता किसान दिल्ली के दरवाजे पर न्याय की गुहार लगा रहा है। लेकिन पूंजीपतियों की पिछलग्गू मोदी सरकार का दिल क्यों नहीं पसीज रहा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश सरकार किसानों को थका दो और भगा दो की नीति पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री टीवी पर सफाई और उनके मंत्री चिट्ठियों की दुहाई तो देते हैं, मगर मुट्ठीभर पूंजीपतियों की सेवक मोदी सरकार किसान की दुश्मन बन बैठी है। कड़वा सत्य यह है कि मोदी सरकार राजनीतिक बेईमानी, धूर्तता व प्रपंच का सहारा ले किसान की समस्या का समाधान करना ही नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि किसानों के रास्ते में सड़के खुदवाने वाले, किसानों पर सर्दी में वॉटर कैनन चलवाने वाले और लाठियां मरवाने वाले मनोहर लाल व दुष्यंत चौटाला को चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए।
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