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चंदाना की बीएससी पास बेटी पूजा खेती में बंटा रही पिता का हाथ

Sun, 26 Jul 2015 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथ्ाल
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 गांव चंदाना निवासी बीएससी पूरी कर चुकी पूजा गांव में मिसाल बनी हुई है। एक भाई एवं तीन बहनों में सबसे बड़ी पूजा हांलाकि फिजिक्स लेक्चरर बनना चाहती है। लेकिन इस दौरान उसके पिता को बड़े बेटे की कोई कमी महसूस न हो, वह ट्रैक्टर चलाकर अपने पिता का कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रही है। गांव में बेटी को ट्रैक्टर चलाता देख हर कोई हैरान तो रह जाता है। लेकिन यह बदलते समय की करवट है। जिस कारण अब सभी बेटियों में अपना भविष्य देख रहे हैं।
गांव में साढ़े तीन एकड़ के किसान इंद्र सिंह ने तीन बेटियां होने के बावजूद उनकी पढ़ाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी हुई। सबसे बड़ी बेटी पूजा को बारहवीं तक की पढ़ाई नवोदय विद्यालय तितरम से करवाई। इसके बाद पूजा ने पिछले ही सत्र में आईजी कॉलेज से बीएससी पूरी की है। अब वह अंबाला में एमएससी की पढ़ाई करने की तैयारी कर रही है। उसकी छोटी बहन बीकॉम कर रही है तो उससे छोटी बहन आईटीआई से कोर्स कर रही है। सबसे छोटा भाई अभी नौंवी कक्षा में है।
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शौक में सीखा ट्रैक्टर चलाना
पूजा ने बताया कि उसके पिता उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं। बारहवीं तक नवोदय से पढ़ाई पूरी करके जब वह घर लौटी तो उसके पिता ने शौक-शौक में उसे ट्रैक्टर चलाना सीखाया। इसके बाद तो वह खेतों में भी ट्रैक्टर लेकर जाने लगी। एक दो बार रोपाई, जुताई का भी कार्य किया। लेकिन ज्यादातर खेतों से पशुओं के लिए चारा सहित अन्य सामान लाने एवं ले जाने के लिए वह बखूबी ट्रैक्टर चलाती है। उसके पिता अभी पढ़ाई के कारण खेतों में जुताई जैसे कार्य कम ही करने देते हैं। लेकिन उसे ऐसा करने में कोई परेशानी नहीं है। उसके ट्रैक्टर चलाने से परिवार को कई बार काफी लाभ मिलता है। वह एमएससी करने के बाद फिजिक्स में लेक्चरर बनना चाहती है।

स्कूटी सीखी तो बनवा दिया ट्रैक्टर का भी लाइसेंस
पूजा के पिता इंद्र सिंह ने बताया कि उसकी नजरों में बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने अपनी बेटी को ट्रैक्टर सीखाया है। उनकी बेटी पूजा पहले स्कूटी लेकर जाती थी। जिस पर उसने उसका लाइसेंस बनवा दिया। घर में ही ट्रैक्टर है तो वह ट्रैक्टर चलाने लगी। जिस पर उसने उसका लाइट ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा दिया है। जब लड़के ड्राइविंग कर सकते हैं तो लड़कियां भी कर सकती हैं। मैं अपनी बेटी को बोझ नहीं मानता। मेरी बेटियां अच्छा पढ़ रही हैं। मैं इनकी पढ़ाई पर बेटे से ज्यादा ध्यान दे रहा हूं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ तो ठीक है, पढ़ाई की व्यवस्था तो करे सरकार
इंद्र सिंह बताते हैं कि एक ओर तो सरकार बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा दे रही है। उसकी बेटी पूजा ने बीएससी कर ली। लेकिन फिजिक्स एवं कैमिस्ट्री में एमएससी के लिए आसपास संस्थान नहीं है। उन्हें अंबाला में आवेदन करना पड़ा है। सरकार बेटियों को पढ़ाने के लिए संस्थान खोले। उनके जैसे लोग पीछे नहीं हटेंगे।
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बेटी के जज्बे को सलाम
गांव के सरपंच सुरेंद्र कुमार कालीरमण का कहना है कि यह हमारे के लिए गर्व का विषय है। साथ ही यह करवट ले रहे समय का भी प्रतीक है। बेटी को बेबाकी से ट्रैक्टर चलाता देख मन हर्षित होता है। हम सभी को खुशी है कि हमारे गांव में इतनी होनहार बेटी है।
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