शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान साढ़े चार माह की गर्भवती एक 22 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों को समझाकर मृतका के शव का पोस्टमार्टम करवाया और उसे परिजनों को सौंप दिया।
मृतक महिला के पति न्यू अशोका कॉलोनी निवासी सुखदेव ने बताया कि उसकी पत्नी सकीमा साढ़े चार माह से गर्भवती थी। शनिवार को शाम के समय उसे अचानक पेट में दर्द होने लगा। वे उसे शहर के निजी अस्पताल में ले आए। डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में दाखिल कर लिया। तीन दिन उसे अस्पताल में रखा। इस बीच सोमवार को शाम के समय उसकी पत्नी को दर्द होने लगा तो डॉक्टरों ने उसे टीका लगाया। टीका लगने के बाद उसकी पत्नी की तबियत और बिगड़ने लगी। इसके कुछ समय बाद महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। इससे पहले उन्होंने डॉक्टरों को कहा था कि वे किसी दूसरे अस्पताल में इलाज करवा लेंगे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें दूसरे अस्पताल में भी नहीं जाने दिया।
अस्पताल की महिला डॉक्टर सुनीता गुप्ता ने कहा कि महिला की बच्चेदानी का मुंह खुल गया था। ऐसे में महिला को दर्द होने लगा था। दर्द कम करने के लिए टीका लगाया गया था, लेकिन हृदय गति रुकने से उसकी मौत हो गई। उन्होंने परिजनों को किसी दूसरे अस्पताल में जाने से नहीं रोका। कोई डॉक्टर नहीं चाहता कि उसके मरीज को किसी प्रकार से दिक्कत हो।
सिविल लाइन थाना एसएचओ रमेश चंद्र ने बताया कि महिला के शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने परिजनों के ब्यान लेकर मामले में 174 के तहत कार्रवाई की है। परिजनों द्वारा किसी पर कोई शक जाहिर नहीं किया गया।