कैथल। लघु सचिवालय व जिला न्यायिक परिसर में स्टांप विक्रेताओं में से अधिकतर के लाइसेंस की अवधि खत्म होने के कारण स्टांप की किल्लत हो गई है। स्टांप विक्रेताओं के लाइसेंस रिन्यू नहीं हो पा रहे हैं। कुछेक के पास अवधि बची है, लेकिन वे इतनी मात्रा में स्टांप नहीं खरीद सकते कि सभी की जरूरत पूरी हो जाए। लोगों के रजिस्ट्री, लोन और एफिडेविट जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं। शहर में इस समय 35 के करीब स्टांप वेंडर हैं, लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा वेंडरों के लाइसेंस की अवधि गत दिसंबर माह में पूरी हो चुकी है। उनका कहना है कि इसके लिए अधिकारियों से लेकर सरकार तक को लिख चुके हैं पत्र, लेकिन उसके बाद भी लाइसेंस रिन्यू नहीं हो रहे हैं।
स्टांप विक्रेताओं के पास रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग अपने कार्यों से आते हैं, लेकिन अधिकतर को यही जवाब मिलता है कि स्टांप समाप्त हो चुके हैं। 10 रुपये तक या इससे थोड़ी बहुत कीमत के स्टांप तो फिर भी मिल जाते हैं, लेकिन 50 व 100 रुपये के स्टांप का वेंडरों के पास भी टोटा बना हुआ है। वेंडरों का कहना है कि तीन वर्ष के लिए बने लाइसेंस जनवरी माह में रिन्यू होने थे, लेकिन अब तक नहीं हुए हैं।
10 रुपये से लेकर 10 हजार तक के स्टांप बेच सकता है वेंडर
वेंडरों का कहना है कि वे 10 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक स्टांप बेच सकते हैं, लेकिन दिक्कतें लाइसेंस समाप्त होने के कारण बनी हुई हैं। ज्यादा कीमत के स्टांप तो ऑनलाइन भी उपलब्ध हो जाते हैं, लेकिन मैनुअल पावर 100 रुपये तक की है। अब लाइसेंस नहीं होने से मौजूद स्टांप भी वे नहीं ले पा रहे हैं।
स्टांप विक्रेता राय सिंह जागलान ने बताया कि लाइसेंस रिन्यू होने का समय 31 दिसंबर था, लेकिन अभी तक नहीं हुए हैं। वे इंतजार में हैं कि जल्द लाइसेंस रिन्यू हो जाए। कोरोना काल में वैसे भी काम बिल्कुल समाप्त हो गया था, अब भी हालात खाली बैठने के बने हुए हैं।
स्टांप विक्रेता राजेंद्र सिंह राणा ने बताया कि लाइसेंस बारे उन्हें समझ नहीं आ रहा किसको शिकायत करें? दो से तीन प्रतिशत कमीशन मिलता है, उसके लिए भी दो महीने पहले से इंतजार कर रहे हैं। कई विक्रेताओं ने तो स्टांप बेचना ही छोड़ दिया है।
निहाल सिंह ने बताया कि 50 व 100 रुपये के स्टांप की मांग सबसे ज्यादा रहती है। अगर ऑनलाइन के लिए भी कोशिश करते हैं तो उस पर भी यही मैसेज देखने को मिलता है कि उनके लाइसेंस का समय समाप्त हो चुका है। 40 वर्ष में अब तक कमीशन में भी कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
सुशील कुमार गुप्ता ने कहा कि लाइसेंस रिन्यूअल के संबंध में वे अधिकारियों से लेकर सीएम तक के साथ पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक रिन्यूअल से संबंधित कोई सूचना नहीं आई है। करीब 80 से 100 लोगों को ऐसे ही वापस भेज दिया जाता है।
डीआरओ श्याम लाल ने कहा कि जिनके लाइसेंस रिन्यू नहीं हुए हैं, उनके बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। अगर लाइसेंस धारकों को किसी प्रकार की दिक्कतें है तो वे उन्हें अवगत करवाएं। वेंडरों के लिए हर तरह के स्टांप पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।