जिस दिन से किसान आंदोलन ने गति पकड़ी है, उसी दिन से किसानों ने भाजपा और जजपा के विधायकों व सांसदों का विरोध शुरू कर दिया है। विरोध को देखते हुए लगभग एक माह तक विधायक ईश्वर सिंह अपने चीका निवास पर दिखाई नहीं दिए थे। रविवार को जैसे ही किसानों को पता चला कि विधायक ईश्वर सिंह अपने निवास पर पहुंचने वाले हैं, तो किसान विरोध करने के लिए विधायक के निवास पर पहुंच गए। लेकिन संख्या कम होने के कारण निवास पर पुलिस ने उनके विरोध को कामयाब नहीं होने दिया। किसान थोड़ी देर बाद शहीद उद्यम सिंह चौक पर दर्जनों की संख्या में पहुंच गए और विधायक का विरोध करते हुए उनका पुतला फूंका। किसानों का आरोप था कि विधायक कृषि कानूनों के खिलाफ उनकी आवाज नहीं उठा रहे हैं। किसान नेता देबू, संधू, गुरी, सुखचैन, जगदेव, निर्मल, चिंटू, गुरमीत, गुरजंट व नोदी चीका का कहना था कि विधायक किसान हितैषी हैं तो अपना इस्तीफा देकर उनके साथ आंदोलन में साथ दें, अन्यथा उनका कोई भी कार्यक्रम इस हलके में नहीं होने दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि जब आंदोलन के दौरान सरकार के मंत्रियों और विधायकों का उनके हलका क्षेत्र में आने या किसी भी कार्यक्रम के करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है तो फिर हलका विधायक का चीका में पहुंचना और लोगों की समस्याएं सुनना किसानों के जले हुए पर नमक छिड़कना है।
हलका विधायक ईश्वर सिंह के पीए से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह एक भोग में शिरकत करने आए थे। कोई जनता से मिलने का यह जनसभा करने का कोई प्रोग्राम नहीं था।