शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूरी पर हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित डा. भीमराव आंबेडकर राजकीय पीजी कालेज में बेटियों को रोजाना 50-60 रुपये ऑटो में किराया देकर कक्षाओं में पहुंचना पड़ रहा है। बेटियां छुट्टी होने के बाद अन्य वाहनों के इंतजार में कालेज के बाहर खड़ी रहती हैं। घंटों इंतजार करने के बाद ऑटो भी मिलता है, जोकि महंगा पड़ता है। छात्राओं का कहना है कि विद्या वाहिनी बस में कालेज से बस स्टैंड पहुंचती थी। इसके बाद आगे भी गांवों में बस सही समय पर मिल जाती थी। बस बंद होने के कारण अन्य साधनों में सफर करना पड़ा है। जिस कारण रोजाना एक या दो लेक्चर मिस हो रहे हैं। वहीं बस स्टैंड पर देरी से पहुंचने के कारण घंटो तक अगली बस का इंतजार करना पड़ता है। शाम के समय बस स्टैंड पर भी बसों की कमी रहती है। छात्राओं का कहना है कि दो महीने से कालेज खुलने के बाद भी विद्यावाहिनी बसों का संचालन नहीं हो रहा है। उन्होंने विद्या वाहिनी बसें दोबारा से शुरू करवाने की मांग की।
आधा से एक घंटा बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ता है
आंबेडकर कालेज में बीबीए संकाय की छात्रा जसप्रीत कौर का कहना है कि बस स्टैंड पर आधे से एक घंटा तक इंतजार करना पड़ता है। तब तक पहला लेक्चर निकल जाता है। इसके कारण पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
दो बहनें आती हैं, महंगा पड़ता है ऑटो
आंबेडकर कालेज में बीबीए संकाय की छात्रा पूजा ने कहा कि वे दो बहनें कालेज आती हैं। दोनों को 1800-1800 रुपये प्रति महीना ऑटो का किराया देना पड़ता है। जोकि बहुत महंगा पड़ता है।
घर पहुंचते-पहुंचते हो जाती है शाम
आंबेडकर कालेज की बीसीए फाइनल ईयर की छात्रा ज्योति ने बताया कि घंटों दूसरे साधन का इंतजार करने के बाद बस पर स्टैंड पहुंचते हैं, तब तक बस निकल जाती है। घर पहुंचते-पहुंचते शाम हो जाती है।
कई बार पैदल भी चलना जाना पड़ता है
आंबेडकर कॉलेज की छात्रा जसप्रीत ने कहा कई बार हालात ये भी हो जाते हैं, कुछ भी साधन नहीं मिलता। इसके बाद मजबूरन पैदल चलना पड़ता है। पहले विद्या वाहिनी बसों में ठीक समय पर कॉलेज पहुंचती थी।