कैथल। नोटबंदी के बाद से अब तक लोगों के पास नकदी को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं लोगों के मन में आ रही हैं। जिसमें सब कुछ एक नंबर में होने के बावजूद अपने खातों में नकदी जमा करवाने या ना करवाने सहित लेन-देन को लेकर लोग आशंकित हैं। ऐसे में अमर उजाला ने चार्टेड अकाउंटेंट से बातचीत कर कुछ बातों को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। आपको बताते हैं कि सीए आरएन गोयल मौजूदा हालात में विभिन्न स्थितियों में क्या करने की सलाह दे रहे हैं।
ये काम करें...
1. आपके पास जो नंबर एक में नकदी है, उसे जमा करवाने में कोई समस्या नहीं है। दुकानदार के पास उनके बही खाते के अनुसार उनके पास आठ नवंबर को जितनी नकदी थी, उसे जमा करवाने में कोई समस्या नहीं है। डरने की आवश्यकता नहीं है।
2. बिना दुकानदारी के जिनके पास एलआईसी की नकदी, भूमि बेचने से प्राप्त आय, जे फार्म कटी हुई कृषि आय, आढ़ती से ली गई उधारी जमा करवाने में कोई परेशानी नहीं है।
3. यदि छह या सात नवंबर को बैंक से नकदी निकलवाई है और वह पुराने नोटों में है तो उसे जमा करवाने में कोई परेशानी नहीं है।
4. जो बैंकों में पहले से ही ट्रांजेक्शन करते आए हैं। उन्हें दो लाख 50 हजार रुपये तक जमा करवाने में कोई परेशानी नहीं है।
5. जिन खातों में कभी कोई ट्रांजेकशन नहीं हुई। उसमें एकदम से ढाई लाख रुपये जमा होंगे तो यह संदिग्ध हो सकता है।
6. जो जन-धन योजना के तहत खुले खातों में 30 हजार 35 हजार तक ही राशि जमा करवाएं।
ये काम ना करें
1. दुकानदार 8 नवंबर तक के फर्जी बिल बनाकर नकदी जमा ना करवाने का प्रयास ना करें, इसकी जांच हो सकती है।
2. किसी दूसरे का नकद अपने खाते में जमा ना करवाएं, इसकी जांच हो सकती है।
3. किसी भी खाते से सरकार जल्द से जल्द नकदी निकासी की अनुमति नहीं देगी। जिससे यदि एक बार जमा करवा दिए तो उसमें से थोड़े-थोड़े ही नकदी निकलेगी। इसी हिसाब से खातों में पैसे जमा करवाएं।
4. बैंकों का जो कंप्यूटर सर्वर है, वह आयकर विभाग के सर्वर के साथ जुड़ा है। जिससे बैंकों में होने वाले लेन-देन की सूचना अपने आप आयकर विभाग के पास पहुंच रही है। जिसमें कुछ भी छुपाया नहीं जा सकता।
5. कृषि की जो लिमिट है, उसमें भी संदिग्ध केसों में जांच हो सकती है। इसमें भी अनाप-शनाप राशि जमा नहीं करवाई जा सकती।
6. बैंक में एकदम से भारी नकदी ले जाने पर तुरंत जांच हो सकती है। इसीलिए बैंकों में नियमानुसार नकदी लेकर जाएं। अपने खातों में जमा करवाएं या फिर आरबीआई द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार इन्हें बदलवाएं।