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जिला नागरिक अस्पताल में अब ढाई घंटे में सीटी स्कैन रिपोर्ट

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में सीटी स्कैन करवाने वाले गंभीर मरीजों को अब दो से ढाई घंटे में रिपोर्ट उपलब्ध करवाने की शुरुआत की गई है। पहले हर प्रकार के मरीज को 24 घंटे में स्कैनिंग रिपोर्ट देने का प्रावधान था। कोरोना महामारी को देखते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का फैसला लिया गया है। यही नहीं जो मरीज बार-बार अस्पताल में आने में सक्षम नहीं है तो उसे भी अब व्हाट्सएप के जरिए रिपोर्ट उपलब्ध करवाई जा रही है। रोजाना कम से कम दो-तीन गंभीर मरीजों की रिपोर्ट जल्द से जल्द या व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध करवाई जा रही है।
नागरिक अस्पताल में रोजाना 20 से 25 व्यक्तियों का सीटी स्कैन किया जा रहा है। कोरोना महामारी से पहले केवल 10 से 12 व्यक्तियों का ही सीटी स्कैन होता था, लेकिन अब कोरोना संक्रमितों की जांच में भी सीटी स्कैन का प्रयोग किया जा रहा है। इस कारण रोजाना सीटी स्कैन करवाने वालों की संख्या बढ़कर 20 से 25 तक पहुंच गई है।
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हालांकि प्राइवेट केंद्रों पर सीटी स्कैन की फीस करीब 4 हजार रुपये के आसपास है। नागरिक अस्पताल में दाखिल किसी मरीज को डॉक्टर सीटी स्कैन करवाने की सलाह देता है तो उसके लिए मरीज से 1870 रुपये चार्ज लिया जा रहा है। वहीं बाहर से सलाह लेकर आने वालों के लिए 2800 रुपये फीस निर्धारित की गई है। अस्पताल में दाखिल कोरोना संक्रमितों से सीटी स्कैन के लिए कोई फीस नहीं ली जा रही। इसके अलावा बीपीएल, कर्मचारी और अनुसूचित वर्ग को भी सीटी स्कैन में विशेष रियायतें दी जा रही हैं।
सिविल सर्जन डॉ. ओमप्रकाश ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान मरीजों को सिटी स्कैन के लिए ज्यादा इंतजार न करना पड़े, इसलिए यह सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही इससे लोगों को बार-बार अस्पताल में भी नहीं आना पड़ता, जिससे सेंटर पर सामाजिक दूरी भी बरकरार रहती है।
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कोरोना काल में सीटी स्कैन की संख्या बढ़ी
शरीर की अंदरूनी बीमारियों की जांच के लिए सीटी स्कैन किया जाता रहा है, लेकिन कोरोना काल में सीटी स्कैन की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई है। इसका एक कारण तो ये है कि अगर आरटीपीसीआर या एंटीजन किट से कोरोना की पुष्टि न हो पाए तो सिटी स्कैन से संक्रमित व्यक्ति का पता लग जाता है। दूसरा बड़ा कारण ये भी है कि अगर कोई संक्रमित व्यक्ति सीटी स्कैन करवाता है तो उससे ये पता लग जाता है कि व्यक्ति के फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों पर बीमारी का अब तक कितने प्रतिशत पर प्रभाव पड़ा है।
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